इसके अलावा महाधिवक्ता कार्यालय के 7 अधिकारी/कर्मचारी, राज्य सरकार के 5 अधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त स्थाई अधिवक्ता कार्यालय के 1 सहायक समीक्षा अधिकारी और उत्तराखंड हाईकोर्ट रजिस्ट्री के 7 अधिकारियों को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महाधिवक्ता कार्यालय, विधि सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार के स्थायी वकील और उच्च न्यायालय के लिए नियुक्त किए गए ओथ कमिश्नर केवल अपने-अपने कार्यालयों, विभागों या संस्थानों से संबंधित न्यायिक कार्यवाही के लिए ही शपथ पत्र प्रमाणित करने के लिए अधिकृत होंगे। सभी नियुक्त अधिवक्ताओं को शपथ आयुक्त प्रभारी के माध्यम से एक अंडरटेकिंग प्रस्तुत करना होगा, जिसमें कोर्ट के दिशा-निर्देशों, रजिस्टर के रखरखाव और कूपन रिकॉर्ड का कड़ाई से पालन करने का वचन दिया जाएगा।
उच्च न्यायालय ने आदेश में कहा है कि कोर्ट के नियमों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी ओथ कमिश्नर को भविष्य में अगले वर्ष की नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।