कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि जमीन के कागजात किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं माने जा सकते। बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार नासिर मोल्ला से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की। नासिर मोल्ला को पिछले जून में गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह डिटेंशन सेंटर में है। उसकी ओर से एक रिश्तेदार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि वह भारतीय नागरिक है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश किए और उन्हें नागरिकता के समर्थन में साक्ष्य बताया।
नागरिकता के मामलों में पहले भी उठ चुका है दस्तावेजों का मुद्दा हाल ही में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने भी एक नागरिकता विवाद से जुड़े मामले में पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पारिवारिक दस्तावेज और जमीन के कागजात सहित कई दस्तावेजों को नागरिकता साबित करने के लिए अपर्याप्त माना था। अदालत ने विदेशी अधिनियम, 1964 की धारा 9 का हवाला देते हुए कहा था कि नागरिकता साबित करने का दायित्व संबंधित व्यक्ति पर ही होता है।
हाल के दिनों में पासपोर्ट को लेकर भी बहस छिड़ी है। केंद्र सरकार के सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, पासपोर्ट अपने आप में नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाता, बल्कि यह मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, जो उपलब्ध दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर जारी किया जाता है।






