बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा हेराफेरी-: सियासत हुई तेज, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों पर हेमंत का पलटवार

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दरीनाथ मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण पर भाजपा-कांग्रेस के बीच सियासत गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आरोपों व सार्वजनिक बहस से भागने के आरोप पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, बदरीनाथ व केदारनाथ करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिरों से संबंधित आरोपों पर बहस सड़क या किसी अन्य स्थान पर नहीं हो सकती है। गोदियाल आरोपों का जवाब बदरी विशाल व बाबा केदार के दरबार में आकर जवाब दें।

द्विवेदी ने कहा, कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल का आरोप है कि आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गणना ड्यूटी में बीकेटीसी अध्यक्ष ने नियुक्त किया। जबकि नौटियाल अप्रैल 2025 से गणना ड्यूटी में तैनात है। उस समय उनके पास बीकेटीसी अध्यक्ष का दायित्व नहीं था। बदरी-केदार मंदिर समिति अधिनियम के अनुसार मंदिर कोष से अन्य विकास कार्य नहीं कराए जा सकते हैं।

 

बिनसर मंदिर व पोखरी का शिव मंदिर बीकेटीसी अधीन नहीं है। इसके बावजूद भी गोदियाल के कार्यकाल में मंदिरों के जीर्णाेद्धार के लिए राशि दी गई थी। मंदिरों को राशि देने के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित करने की बात गोदियाल ने कही है, पर बोर्ड बैठक में तत्कालीन अध्यक्ष गोदियाल ने तीन लोगों की मौजूदगी में प्रस्ताव पारित कराया, उसके पूरे सबूत हैं। उन्होंने कहा बीकेटीसी में वैयक्तिक सहायक का पद 1983 से है लेकिन इस पर नियमों को ताक पर रख कर नौटियाल को पदोन्नति दी गई।

 

हमने तो मंदिर बनाने को पैसा दिया चढ़ावा चोरी नहीं किया : गोदियाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि आरोपों पर सार्वजनिक बहस की चुनौती देकर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का ना आना बताता है कि भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है। कहा, प्रदेश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए मेरे ऊपर आरोप लगाए जा रहे हैं। बतौर बीकेटीसी अध्यक्ष मेरे कार्यकाल में मंदिर बनाने को पैसा दिया गया है लेकिन चढ़ावा चोरी नहीं किया गया। बीकेटीसी अध्यक्ष द्विवेदी की बहस की चुनौती को स्वीकार करते हुए गोदियाल मंगलवार को प्रेस क्लब पहुंचे।

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प्रेसवार्ता में गोदियाल ने कहा, चुनौती देने वाले खुद मैदान छोड़ कर भाग गए। जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देता है और फिर निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होता, वह स्वयं अपनी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देता है। इससे यही संदेश जाता है कि सच्चाई का सामना करने का साहस उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल वर्ष 2003 में बीकेटीसी में नियुक्त हुआ था। वर्ष 2010 में भाजपा सरकार में 32 कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, उसमें नौटियाल का नाम भी शामिल था। वर्ष 2014 में शासन की स्वीकृति के बाद नियमितीकरण किया गया।

मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृति के बाद दिया पैसा

गोदियाल ने कहा, बिनसर मंदिर व पोखरी के शिव मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बोर्ड बैठक में स्वीकृति के लिए बाद पैसा दिया गया। नौ लाख खर्च होने के बाद वर्ष 2017 में भाजपा ने सत्ता में आने के बाद बिनसर मंदिर का निर्माण कार्य रोक दिया। एक साल बाद देवस्थानम बोर्ड की बैठक में फिर से मंदिर निर्माण की स्वीकृति दी गई। टिहरी जिले के प्रताप नगर में मंदिर समिति को दी गई, जमीन के लिए संपर्क मार्ग निर्माण के लिए पैसा दिया गया। उन्होंने सवाल किया नौ साल बाद भाजपा सरकार व बीकेटीसी ने मेरे ऊपर लगे आरोपों की जांच क्यों नहीं कराई। उन्होंने यह भी कहा, बीकेटीसी अध्यक्ष से जुड़ा कोई भी कर्मचारी दान गणना ड्यूटी में तैनात नहीं किया जा सकता है।


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