मेघालय हाईकोर्ट ने सोमवार को शिलांग की एक अदालत द्वारा सोनम रघुवंशी को जमानत देने के अप्रैल 2026 के फैसले को बरकरार रखा है। सोनम रघुवंशी मई 2025 के चर्चित ‘हनीमून मर्डर’ मामले में अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की मुख्य आरोपी है।
गौरतलब है कि शिलांग के अतिरिक्त उपायुक्त (न्यायिक) ने सोनम रघुवंशी को मुख्य रूप से इस आधार पर जमानत दी थी कि पुलिस उसकी गिरफ्तारी के आधारों की प्रभावी तरीके से जानकारी देने में विफल रही, जिससे उसके बचाव के अधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ा।
पुलिस ने की थी क्या गलती?
शिलांग कोर्ट ने कहा था कि किसी भी दस्तावेज में आरोपी को यह नहीं बताया गया कि उसे वास्तव में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या जैसे गंभीर अपराध में गिरफ्तार किया जा रहा है। अदालत ने यह भी माना कि इसे केवल लिपिकीय या टाइपिंग की गलती नहीं माना जा सकता।
शिलांग कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार हाईकोर्ट पहुंची थी। राज्य की ओर से पेश एडवोकेट जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार ने दलील दी थी कि सोनम रघुवंशी की चौथी जमानत याचिका में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि इस प्रक्रियागत त्रुटि से उसे वास्तव में कोई नुकसान पहुंचा।
उन्होंने यह भी कहा था कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में धारा 103 की जगह धारा 403 लिखे जाने की टाइपिंग संबंधी गलती होना स्वीकार किया जा चुका है। हालांकि, अमित कुमार ने कहा कि सोनम रघुवंशी हत्या सहित अपने खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों से पूरी तरह परिचित थी। इसके समर्थन में उन्होंने गिरफ्तारी ज्ञापन पर उसके हस्ताक्षर और रिमांड आदेशों का हवाला दिया।
सरकारी वकील ने दी क्या दलीलें?
एडवोकेट जनरल ने एक मामले का हवाले देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि अगर किसी प्रक्रियागत अनियमितता से वास्तविक नुकसान साबित नहीं होता, तो वह अधिकतम एक सुधार योग्य त्रुटि है और केवल उसी आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
पांच मई की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगदोह ने मौखिक रूप से एडवोकेट जनरल से पूछा था कि अगर यह केवल टाइपिंग की गलती थी तो वही त्रुटि सभी दस्तावेजों में बार-बार कैसे दोहराई गई। यह बात शिलांग कोर्ट ने भी अपने आदेश में दर्ज की थी। इस पर एडवोकेट जनरल ने जवाब दिया था कि रिमांड आदेश में मजिस्ट्रेट ने यह पुष्टि की थी कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारण मौखिक रूप से बता दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने खड़े किए क्या सवाल?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति डिएंगदोह ने यह भी मौखिक टिप्पणी की थी कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज तय प्रारूप (टेम्पलेट) पर आधारित हैं, जिससे प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें आरोपी को सही तरीके से समझाया नहीं गया। एकल पीठ ने यह भी कहा था कि फॉर्म के एक हिस्से में आरोपी को सशस्त्र बलों से “फरार” बताया गया है, जबकि इस मामले में उसका कोई संबंध नहीं था।
टाइपिंग की गलती स्वीकार करते हुए भी एडवोकेट जनरल ने जोर देकर कहा था कि आरोपी आरोपों की प्रकृति से पूरी तरह परिचित थी, क्योंकि शुरुआत से ही उसके पास वकील था, उसने गिरफ्तारी ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और इससे पहले तीन जमानत याचिकाएं भी दाखिल की थीं।
एडवोकेट जनरल ने यह भी दलील दी थी कि आरोपी के फरार होने की आशंका बहुत अधिक है। इस पर न्यायमूर्ति डिएंगदोह ने कहा कि जमानत की शर्तें स्पष्ट हैं और अगर वह फरार होती है तो कानून अपना काम करेगा। सोनम रघुवंशी की ओर से अधिवक्ता एल. थापा ने अधिवक्ता सुदीप राणा की सहायता से पक्ष रखा।
क्या था राजा रघुवंशी हत्याकांड?
यह मामला तब सामने आया जब 12 मई 2025 को शादी करने वाले राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी 23 मई को मेघालय में हनीमून के दौरान लापता हो गए। दोनों को आखिरी बार नोंग्रियाट स्थित एक होमस्टे से चेकआउट करते हुए देखा गया था। कुछ दिन बाद उनकी किराये की स्कूटी सोहरारिम के पास लावारिस हालत में मिली। इसके बाद 2 जून को, लापता होने के करीब 10 दिन बाद, राजा रघुवंशी का शव ईस्ट खासी हिल्स जिले में वीसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई से बरामद हुआ।






