राममंदिर दान में डाका- ‘जैसे निर्देश, वैसा ही करते थे’, इसलिए ट्रस्ट पदाधिकारियों के आगे नतमस्तक थे बैंक अफसर

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राम मंदिर की दान राशि हेरफेर के मामले में बैंक कर्मियों की भूमिका भी बेहद गंभीर मानी जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी अपने एक साक्षात्कार में इसको लेकर सवाल उठाए थे। एसआईटी को बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही और संभावित मिलीभगत के कुछ साक्ष्य मिले हैं।

हालांकि हकीकत यह भी है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के सामने बैंक कर्मी नतमस्तक रहते थे। उन्हें वहां से जैसे निर्देश मिलते थे, वे वैसा ही करते थे, क्योंकि ट्रस्ट के पदाधिकारियों की पहुंच और प्रभाव का सभी को अंदाजा था।

 

दरअसल, गिनती प्रक्रिया में जितनी भूमिका ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कर्मचारियों की होती है, उतनी ही संबंधित बैंक के कर्मियों की भी रहती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गिनती के दौरान किसी को गड़बड़ी न हो। मगर ऐसा नहीं हुआ। बैंकतर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी आंखें मूंदे रहे। 
बैंक अधिकारी रहे खामोश
सूत्रों ने बताया कि बैंक ने यह काम एक निजी कंपनी को सौंप रखा था। कंपनी आउटसोर्सिंग के जरिये कर्मचारियों की भर्ती कर उन्हें गणना प्रक्रिया में लगाती थी। चूंकि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने ही अपने सगे-संबंधियों, परिचितों और उनके करीबियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती कराया था, इसलिए बैंक अधिकारी भी खामोश रहे। एक तरह से ट्रस्टी और उनके कर्मचारी जो चाहते थे, वही होता था।
45 दिन का ही सीसीटीवी बैकअप
राम मंदिर दान की राशि चोरी करने के मामले में एसआईटी को सुबूत जुटाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। सबसे अहम सुबूत सीसीटीवी फुटेज हैं, लेकिन उसमें छेड़छाड़ के सुबूत पहले ही मिल चुके हैं। वहीं सबसे अहम बात यह है कि वहां लगे कैमरों का बैकअप 45 दिनों का ही है। ऐसे में कई वर्षों की फुटेज जुटाना संभव नहीं है। हालांकि एसआईटी मामले की फोरेंसिक जांच कराएगी, जिससे प्रयास होगा कि अधिक से अधिक दिनों की फुटेज रिकवर हो जाए। यही वजह है कि पूछताछ में आए तथ्य मामले में बेहद अहम होने वाले हैं।
नृपेंद्र मिश्रा ने टीवी इंटरव्यू में बताया है कि कर्मचारी रुपयों की गड्डियां रखकर गए। इसके सुबूत मिले हैं। वहीं यह भी बताया कि कैमरों का बैकअप डेढ़ महीने का है। ऐसे में पुराने फुटेज जुटा पाना मुश्किल होगा। इसलिए स्पष्ट रूप से पता कर पाना कि चोरी कब से हो रही थी, इसका सटीक समय मिलना इतना आसान नहीं होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस वजह से एसआईटी संदिग्ध कर्मचारियों और पदाधिकारियों के बयान दर्ज कर रही है। जो पांच संदिग्ध पहले पकड़े गए थे, उनसे भी जानकारी ली जा रही है। उन्होंने लंबे समय से हेरफेर करने की बात स्वीकार की है।
डिलीट करने की बात साबित करना कठिन
ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी महिपाल सिंह ने आरोप लगाया था कि आठ महीने की फुटेज डिलीट की गई। ये फुटेज काफी पहले की हैं। ऐसे में उनका बैकअप उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह आरोप साबित करना बेहद कठिन होगा कि फुटेज डिलीट की गई थीं। हां, यह जरूर है कि यदि बीते डेढ़ महीने में इस तरह का हेरफेर किया गया है तो वह सामने आ सकता है। उसके साक्ष्य भी मिल रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने चढ़ाया था चांदी का छत्र
नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान व्यक्तिगत तौर पर नकद दान नहीं किया था लेकिन मुख्य यजमान के रूप में चांदी का छत्र व लाल रंग के वस्त्र अर्पित किए थे।

नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि दान की गिनती और हिसाब-किताब की जिम्मेदारी बैंक की थी, लेकिन शुरुआती तथ्यों से लगता है कि बैंक ने अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाई। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर नहीं हटाई गई, बल्कि ऑटो-डिलीट सिस्टम के तहत मिट गई। उन्होंने प्रशासनिक प्रबंधन में अनुभव की कमी बताते हुए ट्रस्ट में अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति का सुझाव दिया।
दूध का दूध नहीं, सोने का सोना करें
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे पर कटाक्ष किया। कहा कि उनके भाषण में बयान कम, धमकी अधिक थी। जनता कह रही है कि दूध का दूध, पानी का पानी नहीं, बल्कि सोने का सोना, चांदी का चांदी करें। सूत्र बता रहे हैं कि स्थानीय भाजपा विधायकों और पदाधिकारियों के कहने पर ये कार्यक्रम अचानक तय किया गया, जिससे कि पार्टी की राजनीतिक जमीन बचाई जा सके। अन्यथा, अयोध्या मंडल ही नहीं, पूरे प्रदेश में भाजपा का सूपड़ा साफ होना तय है। चंदा चोरी की जांच कहां तक पहुंची, इसकी नियमित ब्रीफिंग होनी चाहिए। मथुरा से भी आई धांधली की खबर बेहद गंभीर है, उसकी भी उच्चस्तरीय विश्वसनीय जांच हो।
आंकड़े पर संशय
मंदिर में आए श्रद्धालुओं और प्राप्त चढ़ावे के आंकड़ों का सत्यापन करना चाहिए। यदि मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच 16 करोड़ श्रद्धालु आए और चढ़ावा 83 करोड़ रुपये रहा, तो यह औसतन प्रति श्रद्धालु करीब पांच रुपये दान के बराबर है। श्रद्धालुओं की संख्या का रिकॉर्ड प्रतिदिन तैयार होता है। ट्रस्ट को इस अवधि में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या स्पष्ट करनी चाहिए। यदि एसआईटी उनसे कोई जानकारी मांगेगी तो वह पूरा सहयोग करेंगे। गिनती प्रक्रिया की निर्धारित गाइडलाइन में से केवल 10 प्रतिशत का ही पालन किया गया।

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नौ करोड़ की जमीन चंपत राय ने 55.47 करोड़ में खरीदीः संजय
आप सांसद संजय सिंह ने प्रेसवार्ता के दौरान आरोप लगाया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आलोक बंसल, मनीष बंसल और शिवानी बंसल से शाहनवाजपुर माझा में 117 बिस्वा (14,730 वर्ग मीटर) जमीन को 55 करोड़ 47 लाख 31 हजार 800 में खरीदी है, जबकि इसकी वास्तविक मालियत महज 9 करोड़ की है। इस चंदा चोरी और लूट पर प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख मोहन भागवत चुप हैं? इस महाघोटाले के सारे साक्ष्य आधिकारिक रूप से एसआईटी को दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में पीएम मोदी के प्रतिनिधि रहे ज्ञानेश कुमार ने ही चंदा चोरी को संरक्षण दिया। वही अब देश में वोट चोरी करा रहे हैं। इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो, जमीन के दस्तावेज सार्वजनिक हों और चंपत राय समेत अन्य को तत्काल जेल भेजा जाना चाहिए।
ट्रस्ट रामजी के एक-एक पैसे के लिए जिम्मेदारः विहिप
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में अयोध्या में स्थित भगवान श्रीराम मंदिर में चढ़ावे (दान) के पैसों का मुद्दा उठा। कहा कि मंदिर निर्माण के नाम पर बने ट्रस्टों के बैंक खातों की भी जांच की जाए। राम मंदिर से करोड़ों रुपये की हेराफेरी का दोषी कोई भी हो, उसे दंडित किया जाए। निष्काम सेवा ट्रस्ट में चल रही दो दिवसीय केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक की जानकारी देते हुए दंडी स्वामी जितेंद्रानंद्र सरस्वती और विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि चढ़ावे को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे है। ट्रस्ट रामजी के एक-एक पैसे के लिए जिम्मेदार है।
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सच सामने आएगा, 500 साल किया इंतजार, तो 15 दिन और करें : योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी के आरोपों पर कहा कि भक्तों ने राम मंदिर के लिए 500 साल तक इंतजार किया है और वे सच्चाई सामने आने के लिए 15 दिन और इंतजार कर सकते हैं। एसआईटी जल्द से जल्द इस मामले में सच सामने ले आएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो।
सीएम योगी ने कहा, मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है। सभी संबंधित लोगों से अपील है कि एसआईटी की रिपोर्ट आने तक कोई बयान न दें, क्योंकि ऐसी टिप्पणियां जांच को प्रभावित कर सकती हैं। जांच के बाद, अगर किसी पक्ष को कुछ कहना है, तो एसआईटी की प्रक्रिया इसके लिए सही आधार देगी। बिना वजह किसी के चरित्र हनन की कोशिश न करें और बिना कारण अयोध्या धाम को बदनाम करने की कोशिश न करें।

मंदिर में 15 मिनट रहे सीएम, चंपत राय से दूरी
सीएम 15 मिनट तक रामलला के दरबार में रहे। लेकिन, रामलला के दर्शन-पूजन के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की जगह ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने मुख्यमंत्री को पूजा-अर्चना कराई। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव भी इस दौरान दूरी बनाए रहे। आमतौर पर मुख्यमंत्री के मंदिर आगमन पर चंपत राय, डॉ. मिश्र और गोपाल राव ही दर्शन-पूजन की व्यवस्था संभालते रहे हैं।

सीएम योगी अयोध्या के रुदौली स्थित मां कामाख्या धाम में 378 करोड़ रुपये की 126 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे। योगी ने कहा, मैं भरोसा दिलाता हूं कि एसआईटी की जांच सच सामने लाएगी। अगर किसी के पास कोई दस्तावेजी सबूत है, तो उसे एसआईटी को सौंप दें।
उनकी बातों में न आएं जो अयोध्या को बदनाम करना चाहते हैं और श्रीराम मंदिर का अपमान करना चाहते हैं। ये लोग कभी नहीं चाहते थे कि अयोध्या को पहचान मिले। श्रीराम के अस्तित्व को नकारने वाले और रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले लोग आज उपदेश देने का प्रयास कर रहे हैं।

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