जसपाल राणा के करीबी प्रदीप कवि ने बताया कि खेलों के प्रति शुरू से ही उनका विशेष लगाव था। वर्ष 2012 से उन्होंने युवाओं को कोचिंग देनी शुरू की। देहरादून में स्थित शूटिंग रेंज में वह क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क निशानेबाजी का प्रशिक्षण देते थे।
राणा के करीबी दोस्त मोहन सिंह रावत और डॉ. विरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जसपाल बेहद सरल स्वभाव के थे। चार-पांच माह पहले जब वह तीन-चार दिन के लिए गांव आए थे, उस दौरान उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि जसपाल का जन्म उत्तरकाशी जिले में हुआ था, उस दौरान उनके पिता नारायण सिंह आईटीबीपी में तैनात थे। उनकी पढ़ाई मसूरी, दिल्ली आदि जगहों पर हुई। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान उन्होंने शूटिंग का प्रशिक्षण भी लिया।
तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे जसपाल
पूर्व खेल राज्य मंत्री नारायण सिंह राणा के तीन बच्चों में जसपाल सबसे बड़े थे, सुभाष दूसरे और उनके बाद बहन सुषमा राणा हैं। छोटे भाई सुभाष अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज होने के साथ वर्तमान में शूटिंग के कोच भी है। उनकी बहन सुषमा राणा भी निशानेबाज रही है, वह केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के परिवार की बहू हैं। जसपाल की बेटी देवांशी राणा ने भी शूटिंग प्रतियोगिता में विश्वकप चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल और कांस्य मेडल जीतकर पिता का नाम रोशन किया है। छोटा बेटा युवराज भी निशानेबाजी के क्षेत्र में कैरियर बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में देश का नाम रोशन करने वाले जसपाल राणा (50) के आकस्मिक निधन पर उनके पैतृक गांव टटोर नैनबाग चिलामू सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। गांव के बेटे की मौत की खबर सुनते ही क्षेत्र के अधिकतर लोग अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए देहरादून चल दिए।








