धर्मनगरी अयोध्या में ज्येष्ठ माह के पावन अवसर पर श्रीमंगला श्रृंगार आरती सेवा समिति द्वारा रामपथ स्थित संस्कृत पाठशाला, हनुमानगढ़ी में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। सेवा, समर्पण और श्रद्धा से परिपूर्ण इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। समिति के अध्यक्ष महेश तिवारी एवं कोषाध्यक्ष अमन त्रिपाठी के नेतृत्व में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने धार्मिक और सामाजिक सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान हनुमान जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर संकट मोचन सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, गद्दी नशीन के कृपापात्र शिष्य महंत डॉ. महेश दास, अयोध्या के प्रथम महापौर की धर्मपत्नी वंदना उपाध्याय, हनुमानगढ़ी के महंत प्रेममूर्ति कृष्णकांत दास, महंत उपेंद्र दास सहित अनेक संत-महंत, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
भंडारे में रामलला, हनुमानगढ़ी और कनक भवन के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं के लिए पूरी, सब्जी, चावल, बंदिया, कोल्ड ड्रिंक और शीतल जल की विशेष व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं ने समिति के सेवा भाव की सराहना करते हुए प्रसाद ग्रहण किया। पूरे परिसर में भक्ति, सेवा और उत्साह का वातावरण बना रहा।
मुख्य अतिथि महंत संजय दास ने कहा कि समाज में ऐसे धार्मिक और सेवा कार्य लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से सेवा और दान करता है, उस पर प्रभु हनुमान की विशेष कृपा बनी रहती है। उन्होंने समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को इस पुनीत आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

वंदना उपाध्याय ने कहा कि श्रीमंगला श्रृंगार आरती सेवा समिति जिस समर्पण के साथ धार्मिक एवं सामाजिक कार्य कर रही है, वह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि समाज हित में किए जा रहे ऐसे कार्यों को हर संभव सहयोग मिलना चाहिए और भविष्य में भी वह समिति के साथ खड़ी रहेंगी।
समिति के कोषाध्यक्ष अमन त्रिपाठी ने बताया कि समिति का उद्देश्य केवल भंडारा आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और धार्मिक संस्कारों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि समिति हर वर्ष इसी प्रकार भव्य आयोजन कर श्रद्धालुओं की सेवा करती रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों का अंगवस्त्र एवं भगवान हनुमान जी की तस्वीर भेंट कर सम्मान किया गया। अंत में समिति की ओर से उपस्थित संत-महंतों, अतिथियों, सहयोगियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
यह आयोजन केवल एक भंडारा नहीं, बल्कि अयोध्या की सेवा, संस्कार और सनातन परंपरा का जीवंत उत्सव बन गया, जिसकी सराहना हर वर्ग के लोगों ने की।







