खावड़ा में शुरू हुआ चीन के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा बैटरी स्टोरेज सिस्टम, जानिए …

भारत के रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) सेक्टर ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने गुजरात के खावड़ा में 3.37 गीगावाट प्रति घंटे क्षमता वाला बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। कंपनी के अनुसार, एक ही स्थान पर स्थापित यह दुनिया का सबसे बड़ा (चीन के बाहर) बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट है, और वैश्विक स्तर पर इसे सबसे तेज गति से निष्पादित  किया गया है।

 

क्यों मायने रखती है यह परियोजना?

सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन की सबसे बड़ी सीमा यह है कि ये प्राकृतिक परिस्थितियों- जैसे सूरज की रोशनी और हवा- पर निर्भर होते हैं। ऊर्जा क्षेत्र के सामने असली चुनौती यह होती है कि क्या इस उत्पादित ऊर्जा को स्टोर करके उस समय सप्लाई किया जा सकता है, जब मांग अपने चरम पर हो?

यहीं पर बैटरी स्टोरेज तकनीक एक गेम चेंजर के रूप में सामने आती है। खावड़ा में स्थापित यह अत्याधुनिक बैटरी सिस्टम अतिरिक्त रिन्यूएबल पावर को स्टोर करने में सक्षम है, जिसे बाद में आवश्यकतानुसार जारी किया जा सकता है। इससे न केवल पावर ग्रिड को स्थिरता मिलती है, बल्कि ग्रीन पावर की निर्भरता और विश्वसनीयता भी काफी बढ़ जाती है।

 

प्रोजेक्ट और कंपनी के प्रमुख आंकड़े

अदाणी ग्रीन के इस ऊर्जा अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) विकास को निम्नलिखित आंकड़ों के माध्यम से समझा जा सकता है:

    • स्टोरेज क्षमता: खावड़ा परियोजना में कुल 3.37 GWh का संचयी बैटरी स्टोरेज स्थापित किया गया है।
    • विशाल रिन्यूएबल पार्क: खावड़ा में 30 GW क्षमता वाले रिन्यूएबल पार्क की योजना पर काम चल रहा है।
  • कुल ऑपरेशनल क्षमता: इस नई शुरुआत के साथ, पूरे भारत में एजीईएल की कुल चालू रिन्यूएबल क्षमता बढ़कर 19,785.8 मेगावाट हो गई है।
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आगे का आउटलुक 
अदाणी ग्रीन ने भविष्य के ऊर्जा लक्ष्यों को लेकर अपनी रणनीति साफ कर दी है। कंपनी ने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में आक्रामक विस्तार योजनाएं बनाई हैं। अगले साल तक बैटरी क्षमता में 10 GWh की अतिरिक्त वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही, कंपनी ने अगले पांच वर्षों में 50 GWh का एक बड़ा महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

खावड़ा में शुरू हुआ यह बैटरी स्टोरेज सिस्टम न केवल अदाणी ग्रीन के पोर्टफोलियो को मजबूत करता है, बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन (क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन) में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ग्रिड की स्थिरता और पीक डिमांड के प्रबंधन के लिए इस तरह का तकनीकी ढांचा भारतीय ऊर्जा बाजार के भविष्य की दिशा तय करने वाला है।

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