कहते हैं कि जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं, लेकिन कानपुर में एक ऐसी जोड़ी ने जन्म लिया जिसने दुनिया के सामने प्यार और वफादारी की नई मिसाल पेश की है। जिस घर में शादी की शहनाइयां गूंजनी थीं, वहां सिलेंडर ब्लास्ट की आग ने खुशियों को मातम में बदलने की कोशिश की। लेकिन, एक दूल्हे के अडिग फैसले ने न केवल अपनी दुल्हन की जान बचाई, बल्कि अस्पताल के ‘बर्न वार्ड’ को ही पवित्र मंडप बना दिया। शुक्रवार रात जब दूल्हे ने अस्पताल के बेड पर लेटी, पट्टियों में लिपटी दुल्हन की मांग भरी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
खुशियों के बीच ‘अग्नि परीक्षा’
मामला घाटमपुर के जगन्नाथपुर गांव का है। यहाँ रहने वाले जगदीश सिंह की 23 वर्षीय बेटी गरिमा सिंह उर्फ श्वेता की शादी कानपुर के तात्या टोपे नगर निवासी विकास सिंह (27) के साथ तय थी। गुरुवार को बारात आनी थी और 13 मई को घर में मेहंदी का उत्साह था। घर में रिश्तेदारों की भीड़ थी, हंसी-ठिठोली चल रही थी और शादी के गीत गाए जा रहे थे।

इसी बीच नियति को कुछ और ही मंजूर था। देर शाम किचन में गैस सिलेंडर की पाइप से अचानक रिसाव शुरू हुआ और देखते ही देखते पूरे घर में आग की लपटें उठने लगीं। चीख-पुकार के बीच ग्रामीण आग बुझाने दौड़े, लेकिन तभी चूल्हे पर रखी खौलते तेल की कड़ाही पलट गई। गर्म तेल वहां मौजूद लोगों पर जा गिरा। इस भयावह हादसे में दुल्हन गरिमा, उसके पिता जगदीश और फोटोग्राफर समेत कुल 12 लोग बुरी तरह झुलस गए।

चार एंबुलेंस और चीखता हुआ गांव
हादसे के बाद गांव में कोहराम मच गया। आनन-फानन में चार एंबुलेंस बुलाई गईं और सभी घायलों को घाटमपुर सीएचसी ले जाया गया। डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए सभी को कानपुर रेफर कर दिया। दुल्हन और उसके परिजनों को जाजमऊ स्थित मिशिका हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। आग इतनी विकराल थी कि फायर ब्रिगेड को इसे बुझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
डॉक्टर भी हुए भावुक
मिशिका हॉस्पिटल के एमडी डॉ. सुरेंद्र पटेल ने बताया, अस्पताल के इतिहास में यह एक दुर्लभ और बेहद भावुक पल था। हमारे नर्सिंग स्टाफ ने खुद आगे बढ़कर वार्ड को सजाने में मदद की। दुल्हन की स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उसे रिकवर होने और डिस्चार्ज होने में करीब 8 से 10 दिन का समय लग सकता है।








