पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा और अहम फैसला लेते हुए सभी नामित सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। यह कार्रवाई गैर-वैधानिक निकायों, बोर्डों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) से जुड़े अधिकारियों पर लागू होगी। राज्य सरकार के गृह एवं पर्वतीय मामलों विभाग द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि सभी ऐसे पदाधिकारियों की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं, जो नामित आधार पर कार्यरत थे। यह आदेश राज्य के गृह एवं पर्वतीय मामलों विभाग की ओर से जारी किया गया है। आदेश जारी होते ही यह सभी संबंधित विभागों और संस्थानों पर लागू हो गया है।
60 वर्ष से अधिक उम्र वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई
सरकार ने उन सभी अधिकारियों को भी सेवा से हटा दिया है, जो 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु पार करने के बाद पुनर्नियुक्त या सेवा विस्तार पर कार्यरत थे। आदेश में कहा गया है कि अब ऐसे सभी पुनर्नियोजन और एक्सटेंशन तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाते हैं। इस निर्णय को पश्चिम बंगाल सरकार के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य विभिन्न बोर्डों और उपक्रमों में पारदर्शिता और नई कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना है। हालांकि, इस आदेश के पीछे आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर प्रशासनिक पुनर्गठन के रूप में देखा जा रहा है।
पहली कैबिनेट में शुभेंदु सरकार ने लिए कई अहम फैसले
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- इससे पहले कैबिनेट बैठक में सबसे अहम निर्णयों में सीमाई सुरक्षा को लेकर बीएसएफ को आवश्यक जमीन सौंपने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने का फैसला शामिल है। मुख्यमंत्री ने भूमि एवं राजस्व विभाग तथा मुख्य सचिव को अगले 45 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने अवैध घुसपैठियों के हित में केंद्र और अदालतों के निर्देशों की अनदेखी की थी।
- सरकार ने राज्य को आधिकारिक रूप से आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने का भी निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग को केंद्र सरकार के साथ आवश्यक समझौते जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
- इसके साथ ही प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना, पीएम श्री, विश्वकर्मा योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला योजना समेत कई केंद्रीय योजनाओं को राज्य में तेजी से लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की गई। जिला अधिकारियों को सभी लंबित आवेदनों को शीघ्र केंद्र को भेजने का निर्देश दिया गया है।







