अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर हालात लगातार गंभीर होते नजर आ रहे हैं। बातचीत को लेकर अनिश्चितता के बीच अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि स्थिति कभी भी टकराव में बदल सकती है। ईरान के सांसद अली खेजरियन ने दावा किया है कि अमेरिका किसी भी समय ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू कर सकता है। उन्होंने पहले भी कहा था कि दोनों देशों के बीच युद्ध होना तय है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक ईरान सरकार या अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान भी चर्चा में है। खबरों के मुताबिक, उन्होंने तेल पाइपलाइन को लेकर कड़ा रुख दिखाया है और धमकी भरे संकेत दिए हैं। हालांकि, यह साफ नहीं है कि यह बयान मौजूदा हालात से सीधे तौर पर जुड़ा है या नहीं।
पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल
इसके अलावा ईरान के दशतेस्तान से सांसद इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान को अमेरिका और ईरान के शांति वार्ता में अच्छा मध्यस्थ (मीडिएटर) नहीं माना है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान भले ही ईरान का अच्छा दोस्त और पड़ोसी देश है, लेकिन वह बातचीत के लिए सही मध्यस्थ (मीडिएटर) नहीं है। रेजाई ने साफ कहा कि पाकिस्तान में निष्पक्ष मध्यस्थता के लिए जरूरी भरोसा और साख की कमी है। उनका आरोप है कि पाकिस्तान हमेशा डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के हितों को ध्यान में रखता है और कभी भी उनके खिलाफ खुलकर कुछ नहीं कहता।
पाकिस्तान के वादे पर ईरानी सांसद के सवाल
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान दुनिया को यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि अमेरिका ने पहले उसके प्रस्ताव को मान लिया था, लेकिन बाद में अपनी बात से पीछे हट गया। इसके अलावा, रेजाई ने कहा कि अमेरिका ने लेबनान से जुड़े मुद्दों और रोकी गई संपत्तियों को लेकर भी कुछ वादे किए थे, जिन्हें पूरा नहीं किया गया। ईरानी सांसद ने यह भी कहा कि किसी भी मध्यस्थ के लिए सबसे जरूरी है कि वह पूरी तरह निष्पक्ष रहे। लेकिन उनके मुताबिक, पाकिस्तान हमेशा एक ही पक्ष की तरफ झुका रहता है, जो उसे इस भूमिका के लिए कमजोर बनाता है।
इस्राइल के प्रभाव में अमेरिका, समझिए मायने
एक तरफ वार्ता पर संशय जारी है। दूसरी ओर इस्राइल इस युद्ध को फिर से शुरू करने की बात कर रहा है। ऐसे में अब ईरानी सांसद खेजरियान ने आरोप लगाया है कि इस्राइल के प्रभाव में आकर अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। उनका कहना है कि क्षेत्र में अमेरिकी सेना की बढ़ती तैनाती इस बात का संकेत है कि हमला किसी भी समय हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के फैसलों में इस्राइल का असर दिखाई देता है। इसके साथ ही खेजरियान ने पहले यह भी दावा किया था कि ईरान ने वॉशिंगटन के साथ सभी बातचीत रोक दी है। हालांकि, इस पर भी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप के बयान और दावे, अलग क्या?
दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा है कि अमेरिका और ईरान के अधिकारी फोन पर बातचीत करके इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास बातचीत के सभी विकल्प खुले हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हालिया तनाव और हमलों के दौरान ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचाया है। कहा जा रहा है कि इस नुकसान की कीमत अरबों डॉलर में हो सकती है।
रिपोर्ट्स में और क्या-क्या?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पश्चिम एशिया के कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों, गोदामों, कमांड सेंटर, एयरक्राफ्ट हैंगर और रडार सिस्टम को निशाना बनाया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। एक हैरान करने वाली बात यह भी सामने आई है कि ईरान का पुराना एफ-5 लड़ाकू विमान आधुनिक अमेरिकी सुरक्षा प्रणाली को चकमा देकर हमला करने में सफल रहा। इसे ईरान के लिए बड़ी सफलता और अमेरिका के लिए झटका माना जा रहा है।









