ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की आधिकारिक पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने की है। यह घटना शनिवार को हुई, जब अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले में 86 वर्षीय खामेनेई की जान चली गई। इस हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए इसे ईरान के लोगों के लिए सबसे बड़ी संभावना बताया और कहा कि अब ईरान अपने देश को पुनः प्राप्त कर सकता है।
उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर शनिवार को 30 मिसाइलों से हमला हुआ था। हमले में उनकी बेटी-दामाद, बहू और पोती समेत कॉम्प्लेक्स में मौजूद 40 कमांडर्स भी मारे गए हैं। हमले के समय खामनेई कमांडर्स के साथ मीटिंग कर रहे थे।
इजराइल के प्रधानमंती नेतन्याहू ने शनिवार देर रात खामनेई के मारे जाने की बात कही थी। इसके कुछ देर बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी उनके मारे जाने का दावा किया था। रविवार सुबह ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसी ‘तसनीम’ और ‘फार्स’ ने इसकी पुष्टि की।
खामनेई के मारे जाने पर ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित कर दी गई है। ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा, ‘हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश शोक मना रहा है।’
खामेनेई की मौत न्याय है- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा “खामेनेई, जो इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक था, अब मृत है।” ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निष्क्रिय करने के लिए जारी हमले को सही ठहराया और यह भी चेतावनी दी कि हमले सप्ताह भर जारी रहेंगे।
कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई
86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई एक धर्मगुरु थे, जो 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च नेता) के पद पर काबिज थे। उन्होंने ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद यह पद संभाला था। खुमैनी ने ही 1979 की इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया था, जिसमें अमेरिका समर्थित शाह को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। मौजूदा वक्त तक खामेनेई देश के आध्यात्मिक नेता होने के साथ-साथ सरकार, सेना और न्यायपालिका की अंतिम और सर्वोच्च शक्ति अपने पास रखते थे।








