कुलसारी मंदिर परिसर में कुलसारी पड़ाव समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह भंडारी की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में कहा गया कि श्रीनंदा देवी राजजात के लिए कई भ्रांतियां लोगों में है। यहां वक्ताओं ने राजा की मनौती को राजजात के परिपेक्ष्य में सही ठहराया। बैठक में कहा गया कि आगामी 2026 में होने वाली लोकजात को भव्य रूप में आयोजित किया जाए।
और वर्ष 2027 में प्रस्तावित श्रीनंदा राजजात के लिए सभी पड़ावों पर विकास योजनाओं को समय पर पूरा किया जाएगा। समन्वय समिति में कर्णप्रयाग, थराली, देवाल तथा नंदानगर (घाट) के ब्लॉक प्रमुखों को समिति के संरक्षक के रूप में चुना गया जबकि मंशाराम गौड़ को समिति के आमंत्रित सदस्य में शामिल किया गया है। वहीं कुरुड़, वाण, बधाणगढ़ी और देवराड़ा मंदिर समिति के अध्यक्षों को पदेन उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया।
बड़ी जात और राजजात के बीच चलती रही बातें
बैठक में बधाण पट्टी के 14 सयाने, सिद्धपीठ कुरुड़ और देवराड़ा के पुजारी गौड़ ब्राह्मण, राजजात और बड़ी जात समिति के पदाधिकारी तथा यात्रा पड़ाव समितियों के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कुछ लोगों ने कहा कि परंपरा के अनुसार बड़ी जात अपने निर्धारित समय वर्ष 2026 में ही होनी चाहिए। अधिकतर लोगों का कहना है कि 2025 में आई आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हुए यात्रा मार्गों का सुधारीकरण नहीं हो पाया है। विशेषकर निर्जन हिमालीय क्षेत्र में यात्रा मार्ग की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में श्रीनंदा देवी राजजात का आयोजन जोखिमभरा हो सकता है। इसलिए इसपर गंभीरता से सोचा जाना चाहिए। अधिकतर लोगों ने कहा कि यात्रा पड़ावों के अवस्थापना विकास के बगैर राजजात का आयोजन 2026 में होना मुश्किल है। इसलिए राजजात 2027 में ही होनी चाहिए।