पिथौरागढ़- हिमालय पर प्रकट हुआ दूसरा ओम पर्वत, हिमाद्रि तुंग श्रृंग पर कुदरत की कलम ने लिखा एक और ओंकार

 

 

हिमालय की ऊंची चोटियों पर हुई हालिया बर्फबारी के बाद एक अद्भुत नजारा सामने आया है। धारचूला और मुनस्यारी के मध्य हिमालय में पर्वत की चोटी पर ओम की स्पष्ट आकृति उभर आई है। इसे हिमालय का दूसरा ओम पर्वत कहा जा रहा है। बर्फ की सफेद चादर पर उभरी यह आकृति दूर से ही आकर्षित कर रही है।

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुराणों में हिमालयी क्षेत्र में आठ ओम पर्वतों का उल्लेख मिलता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि अब दिखाई दे रहा यह पर्वत उन्हीं में से एक है। पहले बर्फ कम होने के कारण यह आकृति धुंधली और अस्पष्ट नजर आती थी लेकिन हाल की बर्फबारी के बाद ओम का स्वरूप साफ और स्पष्ट दिखने लगा है।

शिव की भूमि कहे जाने वाले हिमालय पर्वत पर दूसरे ओम की आकृति दिखाई देने से क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह है। सुबह-शाम लोग दूर से ही इस पर्वत के दर्शन कर रहे हैं। पूजा-अर्चना भी कर रहे हैं। कई लोग इसे आध्यात्मिक संकेत मान रहे हैं तो कुछ इसे प्रकृति का चमत्कार बता रहे हैं। बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों पर उभरा यह ओंकार आज न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है बल्कि प्रकृति और अध्यात्म के अद्भुत मेल का प्रतीक भी बन गया है।

कुदरत का करिश्मा या पुराणों की भविष्यवाणी
हिमालय में नजर आ रही ओम की यह आकृति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। शिक्षाविद डीएस पांगती का कहना है कि यह कुदरत का करिश्मा है जो प्रकृति की अद्भुत रचनात्मक शक्ति को दर्शाता है। पंडित भाष्कर चंद्र जोशी बताते हैं कि पुराणों में वर्णित आठ ओम पर्वतों में से यह एक है। मान्यता है कि कलियुग में ये ओम पर्वत धीरे-धीरे प्रकट होंगे। यह उसकी एक कड़ी हो सकती है।

मूल ओम पर्वत से बड़ी है नई आकृति
डीडीहाट से बीते मार्च में भी हिमालय में ओम जैसी आकृति नजर आई थी। तब जानकारों का कहना था कि पूर्व दिशा में दिख रही यह आकृति वास्तविक ओम पर्वत से भी बड़ी है। उस समय बर्फ कम होने के कारण इसकी रेखाएं स्पष्ट नहीं थीं लेकिन अब बर्फ जमने से ओम का आकार पूरी तरह उभर आया है।

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