मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी,भोपाल में बड़े हर्ष उल्लास के साथ बसंत पंचमी का त्योहार मनाया गया, इस अवसर पर पुस्तकालय में खास तैयारियां भी की गई l इस शुभ अवसर पर पुस्तकालय की क्षेत्रीय ग्रंथपाल रत्ना बाधवानी ने सर्वप्रथम पुजारी को बुलवाकर समस्त स्टाफ सदस्यों व अध्ययन कर रहे समस्त छात्र छात्राओं के साथ माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा अर्चना कर सभी को बसंत पंचमी के पर्व का धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व बताया उन्होंने बताया कि- इसी दिन विद्या की देवी मानी जाने वाली मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था l हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है l यह दिन ज्ञान, कला, संगीत और शिक्षा की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है l बसंत पंचमी बसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है, जो सर्दियों के अंत और गर्मियों की शुरुआत का संकेत देता है l प्रकृति में हरियाली, सरसों के पीले फूल इस पर्व को और खास बना देते हैं l यह दिन छात्रों, लेखकों और शिक्षकों के लिए भी उत्तम माना जाता है l मां सरस्वती की पूजा करने से विद्या, बुद्धि, सुख और समृद्धि प्राप्ति होती है l

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन का वास्तविक अर्थ पुस्तकों और कलम की पूजा तक सीमित नहीं है l इसका वास्तविक भाव है विचारों की पवित्रता, वाणी का संयम, आचरण की मर्यादा और प्रतिभा का समाज के लिए समर्पण l इस दिन सभी पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की आराधना करते है एवं पीले रंग की चीजों का प्रसाद चढ़ाते है l मां सरस्वती की पूजा के लाभ से ही सभी जीवों को वाणी, ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति हुई l पुस्तकालय में इस अवसर सभी में चारो तरफ खूब हर्ष उल्लास देखने को मिला, पूजा की समाप्ति के बाद सभी को प्रसाद का भी वितरण किया गया l इस कार्यक्रम में ग्रंथपाल निशा बातव, प्रबंधक रचित मालवीय के साथ-साथ सभी स्टाफ सदस्यों का विशेष योगदान रहा l








