श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के महानायक, पूर्व सांसद एवं साकेतवासी महंत डॉ. रामविलास दास वेदांती महाराज को उनकी तेरहवीं संस्कार के अवसर पर संतों, महंतों और श्रद्धालुओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को नयाघाट स्थित हिंदू धाम आश्रम में आयोजित तेरहवीं भंडारे में बड़ी संख्या में संत-महंत, विशिष्टजन, शिष्य, अनुयायी एवं परिकर उपस्थित रहे। सभी ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें विनम्र नमन किया।इस अवसर पर संतों ने एक स्वर में कहा कि श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती महाराज का योगदान अतुलनीय रहा है। उनके त्याग, तपस्या और संघर्ष का ही प्रतिफल है कि श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य, दिव्य और नव्य राममंदिर का निर्माण हुआ, जिसमें श्रीरामलला सरकार आज ठाठ के साथ विराजमान हैं। राममंदिर निर्माण में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। भव्य राममंदिर के निर्माण के साथ उनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया है। कार्यक्रम में साकेतवासी महंत डॉ. रामविलास दास वेदांती महाराज के उत्तराधिकारी महंत डॉ. राघवेश दास ने कहा कि गुरुदेव भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यश-कीर्ति सदैव हम सबके साथ रहेगी। उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका जीवन लक्ष्य श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण था, जो आज पूर्ण हो चुका है। गुरुदेव ने श्रीरामलला के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में सहभागिता कर अपने जीवन का वह स्वप्न साकार होते हुए अपनी आंखों से देखा। अंत में महंत डॉ. राघवेश दास वेदांती महाराज ने पधारे हुए संत-महंतों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत-सम्मान किया तथा भेंट देकर विदाई दी।श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में महंत कमलनयन दास, महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य, जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य, श्रीमहंत धर्मदास, अधिकारी राजकुमार दास, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय सहित अनेक संत-महंत, आचार्य और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।








