2026 सुरक्षित इंटरनेट दिवस: एडल्ट कंटेंट के जाल में फंस रहे मासूम, फोन देने से पहले सेट करें ये पैरेंटल कंट्रोल

हर साल फरवरी के दूसरे सप्ताह के मंगलवार को सुरक्षित इंटरनेट दिवस यानी Safer Internet Day मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 2004 में यूरोपीय संघ के ‘सेफ-बॉर्डर्स’ प्रोजेक्ट के तहत की गई थी, जिसे बाद में यूरोपियन कमिशन का पूरा समर्थन मिला। इसका मकसद इंटरनेट को सभी के लिए खासकर बच्चों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित जगह बनाना है।
क्या है Safer Internet Day का लक्ष्य?
इसकी शुरुआत यूरोप में हुई थी लेकिन आज भारत समेत दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में इस दिन का महत्व है। इसका मूल उद्देश्य बच्चों और युवाओं को साइबर बुलिंग, डेटा के गलत इस्तेमाल और अश्लील सामग्री जैसे ऑनलाइन खतरों के प्रति सचेत करना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि इंटरनेट को एक जिम्मेदार और सुरक्षित स्थान बनाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

आज के सोशल मीडिया के दौर में बच्चे गैजेट्स के साथ काफी समय बिताने लगे हैं। यह उनके मानकिस वाकिस में बाधा तो बन ही रहा है साथ ही उन्हें घटिया कंटेंट की खतरनाक लत भी लगा रहा है। ऐसे में एक माता-पिता के लिए अपने बच्चों को ऑनलाइन अडल्ट कंटेंट के दलदल से बचाना भी जरूरी है।

 

पाबंदी नहीं, तकनीक को समझने की है जरूरत
अक्सर माता-पिता बच्चों को स्मार्टफोन की लत छुड़वाने के लिए उसे छिपा देते हैं या उनसे सख्ती से पेश आते हैं। बच्चों को स्मार्टफोन की आदन न लगे इसलिए ऐसा करना कुछ हद तक सही भी है। लेकिन तकनीक से भागना इसका समाधान नहीं है, बल्कि उसे समझकर सुरक्षित बनाना ही एकमात्र रास्ता है। दरअसल, सेफर इंटरनेट डे का लक्ष्य यही है। बच्चों पर सख्त पाबंदी लगाने के बजाय उनके लिए डिजिटल सीमाएं तय करना, स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करना और सही सेटिंग्स को चुनना कहीं ज्यादा व्यवहारिक और असरदार साबित होता है।

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कहां-कहां छिपा है खतरा?
पहले माना जाता था कि अश्लील कंटेंट सिर्फ कुछ खास वेबसाइटों पर होता है, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अब अडल्ट और अश्लील कंटेंट उन प्लेटफॉर्म्स में भी धड़ल्ले से उपलब्ध हो चुके हैं जिन्हें हम सुरक्षित मानते थे। जैसे:

  • सोशल मीडिया एल्गोरिदम: रील्स और शॉर्ट्स का इंगेजमेंट मॉडल बच्चों को अनजाने में भड़काऊ विजुअल्स और अश्लील इशारों वाले वीडियो की ओर खींचता है।
  • गेमिंग और इन-गेम चैट: ऑनलाइन गेम्स के भीतर चैट फीचर्स और थर्ड-पार्टी लिंक के जरिए अश्लील भाषा का खतरा बना रहता है।
  • एआई का नया खतरा: बीते दिनों एआई चैटबॉट ग्रोक के आपत्तिजनक तस्वीरें बनाने के विवाद ने साफ कर दिया है कि बिना फिल्टर वाले एआई टूल्स बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे में सेफर इंटरनेट डे इसी खतरे को पहचानने और रोकने की याद दिलाता है।

 

कौन-से एप कर सकते हैं मदद?

  1. Google Family Link: 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ये एप बेस्ट माने जाते हैं। इसके जरिए आप दूर बैठे तय कर सकते हैं कि बच्चा कौन सा एप डाउनलोड करेगा और रात में फोन कब तक चला सकेगा। एक बार समय पूरा हो गया, तो फोन खुद से लॉक हो जाएगा।
  2. Watcher – Parental Control: यह एप केवल एंड्राइड के लिए है। इसके जरिए आप बच्चे की स्क्रीन लाइव देख सकते हैं और गैलरी तक एक्सेस कर सकते हैं।
  3. FlashGet Kids: इससे आप बच्चे के फोन का कैमरा और माइक रिमोटली ऑन करके देख सकते हैं कि उसके आसपास क्या चल रहा है और वह क्या बातें कर रहा है।
  4. ScrinTrim: छोटे बच्चों के लिए एक मनोवैज्ञानिक ट्रिक जैसा है। ये एप ऐप तय समय बाद फोन की ब्राइटनेस जीरो कर देता है, जिससे बच्चे को लगता है कि फोन खराब हो गया है।
  5. Screen Time और Digital Wellbeing: ये इन-बिल्ट फीचर्स हैं जो एप-वाइज टाइम लिमिट सेट करने में मदद करते हैं, जिससे स्क्रीन की लत पर काबू पाया जा सकता है।
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इन एप्ल में तुरंत करें बदलाव

1. YouTube: रिस्ट्रिक्टेड मोड और किड्स एप
इसके लिए यूट्यूब के सेटिंग्स के जनरल में जाकर रिस्ट्रिक्टेड मोड ऑन करें। छोटे बच्चों के लिए केवल यूट्यूब किड्स ही इस्तेमाल करने दें जहां कंटेंट पहले से क्यूरेटिड होता है।

2. Instagram: टीन सेफ्टी और लेस कंटेंट
बच्चे के अकाउंट को प्राइवेट करें। फिर सेटिंग्स में जाकर कंटेंट प्रिफरेंस में जाएं। यहां सेंसटिव कॉन्टेंट को लेस पर सेट करें। इसके हिडन वर्ड फीचर से गालियों को भी ब्लॉक किया जा सकता है।

3.एआई टूल्स पर लगाम
चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे टूल्स को सीधे इस्तेमाल करने देने के बजाय, पैरेंटल कंट्रोल के जरिए अपने फैमिली अकाउंट से जोड़ें। इससे आप मॉनिटर कर पाएंगे कि बच्चा एआई से क्या सवाल पूछ रहा है।

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