पूरे हुए वंदे मातरम के 150 साल: 6 पदों का है वास्तविक गीत, 2 पद संस्कृत और बाकी इस भाषा में

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राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के डेढ़ सौ साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सालभर चलने वाले कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इससे पहले संस्कृति मंत्रालय ने इसके लिए एक विशेष अभियान पोर्टल लॉन्च किया। इस पोर्टल पर यह गीत ऑडियो और शब्दों के साथ सुनने के लिए उपलब्ध है। साथ ही ‘वंदे मातरम’ पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है, जो इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्वपूर्व के दर्शाती है।

डिजिटल अभियान ‘वंदे मातरम् के साथ कराओके’ नागरिकों को अपने स्वर में गीत रिकॉर्ड करके इसे अभियान की वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यह पहल राष्ट्रीय गर्व और सामूहिक भागीदारी की भावना को मनाने के लिए है। वंदे मातरम का वास्तविक गीत छह पदों का है। जिसमें दो पद संस्कृत के हैं, जबकि बाकी चार पद बंगाली में हैं। हालांकि इन चार पदों में संस्कृत के शब्दों का भी मिश्रण है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-

 

पहले यह जानते हैं कि वंदे मातरम के संस्कृति में पहले दो पद कौन से हैं। इनमें पहला पद- ‘वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥’ इसका भाव है- मैं मां भारत को प्रणाम करता हूं। जो जल से भरपूर है, फल-फूलों से भरी हुई है, जिसे ठंठी और ताजी हवा (मलय) मिलती है, जिसका खेत-खलिहान हरे-भरे हैं, ऐसी मातृभूमि को मैं प्रणाम करता हूं।

दूसरा पद- ‘शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्, फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्, सुखदाम् वरदाम् मातरम्। वन्दे मातरम्॥’ इसका भाव है- मैं मां भारत को प्रणाम करता हूं, जो श्वेत चांदनी से जगमगाती रातों जैसी है, जो फूलों से लदी पेड़ों से सजी हुई है, जो मधुर मुस्कुराहट वाली और मीठी बोली वाली है, जो सुख और वरदान देने वाली है।

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आइए अब बाकी चार पदों के बारे में पढ़ते हैं, जो संस्कृत के कुछ शब्दों के मिश्रण के साथ बंगाली में लिखे गए हैं।

तीसरा पद- ‘कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले, कोटि-कोटि भुजोधृत खरकरवाले, के बोले मां तु्मि अबले, बहुबलधारिणी नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणी मातरम्। वन्दे मातरम्॥’ इसका भावार्थ है-  करोड़ों लोगों के गले से तेरी जय-जयकार गूंज रही है। तेरे हाथों में कितने ही अस्त्र हैं, फिर भी कोई कहता है कि तू असहाय है? हम तेरी शक्ति और साहस को नमन करते हैं, जो दुश्मनों का संहार करने वाली है। हे वीर मातृभूमि , मैं तुझे नमन करता हूं।

चौथा पद- ‘तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि हदि तुमि मर्म, त्वमहि प्राणः शरीर, बाहुते तुमि मां शक्ति, हृदये तुमि मां भक्ति, तोमारै प्रतिमा गढि मन्दिरे-मन्दिरे। वन्दे मातरम्॥’ इसका भावार्थ है- तुम ही ज्ञान हो, तुम ही धर्म हो, तुम ही हृदय और तुम ही आत्मा का सार हो। हमारे प्राण और शरीर में भी तुम ही हो, हे मां शक्ति। हृदय में तुम ही भक्ति हो। हम तुम्हारी मूर्तियां मंदिर- मंदिर में बनाते हैं।

पांचवा पद है- ‘त्वमहि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी, वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्, नमामि कमलाम्, अमलाम् अतुलाम्, सुजलां सुफलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥’ इसका भावार्थ है- तुम ही दुर्गा हो, दस हाथों में अस्त्र धारण करने वाली, तुम ही लक्ष्मी हो, कमल के फूलों में रहने वाली, तुम ही वाणी और विद्या देने वाली हो। मैं तुम्हें नमन करता हूं, तुम्हें नमन करता हूं, जो निर्मल और अतुल्य हो, जो सजीव, फल-फूल वाली माता हैं।

छठवां पद– ‘श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूमिताम्, धरनीम् भरनीम् मातरम्। वन्दे मातरम्॥’ हे मां, तू हमारी आन, शान और सुख-संपत्ति की स्रोत है। ऐसी मातृभूमि को मैं प्रणाम करता हूं।

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