अयोध्या दो दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने वेब पोर्टल,यू ट्यूब चैनल्स और सोशल मीडिया पर चलने वाली खबरों को लेकर चिंता जताई थी।सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने स्पष्ट रुप से कहा था कि इन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है।यह बिना किसी जिम्मेदारी के आम लोगों,जजों एवं अलग अलग संस्थाओं को बदनाम करने वाली खबरें चलाते हैं।
साधारणतया देखा जाये तो सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से इस तरह के मीडिया और सोशल साइटस से जुड़े लोग असहमत हो सकते हैं परंतु सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस वक्त एकदम सटीक साबित होती है जब इन तरह की साइटस से जुड़े लोग खबर की तह तक गये बगैर ही अपने निजी स्वार्थ के लिये किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ एक तरफा खबर चला देते हैं फिर उन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं होता कि जिस व्यक्ति या संस्था के खिलाफ उन्होंने खबर चलाई है वह दोषी है भी या नहीं .? उन्हें इस बात से भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी खबर ऐसे लोगों के मस्तिष्क और सामाजिक पृष्ठभूमि पर क्या प्रभाव डालेगी। उन्हें तो मतलब सिर्फ अपने उस निजी स्वार्थ से है जिसके लिये वह दिन भर कैमरे वाला बड़ा सा मोबाइल लेकर इधर उधर भागते रहते हैं।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का इन सब चिंता जताना एकदम ज़ायज़ है।
ऐसा ही एक मामला अयोध्या के शंकरगढ़ स्थित एक मेडिकल सेंटर का सामने आया है। खुद को डॉ रुबी सिंह बताने वाली महिला ने इस मेडिकल सेंटर पर अपनी पार्टनर्शिप की बात कही और व्हाट्स्अप ग्रुपों सहित कुछ वेव पोर्टल और यू ट्यूब चैनल्स ने खबर की तह तक जाये बगैर ही उक्त महिला के बयान को आधार बनाते हुये खबरें चला दीं उन्होंने दूसरे पक्ष यानि कि मेडिकल सेंटर के संचालक का बयान लेना तक जरुरी नहीं समझा।
जिस तरह से एकतरफा यह खबर बनाई और दिखाई गई इसका मतलब साफ है और बड़ी आसानी से समझा जा सकता है। ऐसी खबरों को देखने और पढ़ने के बाद सुपीर्म कोर्ट की वेब पोर्टल और यू ट्यूब चैनल्स पर की गई टिप्पणी एकदम सटीक और ज़ायज़ प्रतीत होती है ।
अब आइये पूरा मामला समझते हैं।
मामला अयोध्या के शंकरगढ़ स्थित चरक मेडिकल सेंटर का है। खुद को डॉ रुबी सिंह बताने वाली महिला का कहना है कि वह सोहावल में अस्पताल चलाती थी। उसने डॉ अरविंद श्रीवास्तव से अपनी पार्टनर्शिप होने की भी बात कही।कहा अपना खुद का अस्पताल बंद करके उन्होंने इनके अस्पताल में पार्टनर्शिप कर ली। जबकि वह यह भी वह खुद ही कह रहीं हैं कि उनके और डॉ अरविंद श्रीवास्तव के बीच कोई रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं हुआ था।अब आप खुद सोचिये अगर यह बात कोई कम पढ़ा लिखा या अनपढ़ व्यक्ति कहता तो समझा जा सकता है परंतु उच्च शिक्षा प्राप्त खुद को डॉ बताने वाला कोई शख्श यह कहे कि उसने बिना किसी रजिस्ट्रर्ड एग्रीमेंट साइन किये अपना चलता हुआ अस्पताल बंद कर दिया तो हजम नहीं होता। प्रकरण में सस्पेंस देख कर हमने मेडिकल सेंटर के संचालक डॉ अरविंद श्रीवास्तव से जब मामले को लेकर जानकारी की तो मामले से जुड़ा एक तीसरा और मुख्य तथ्य सामने आया कि इस सारे प्रकरण में अमित मिश्रा नामक एक व्यक्ति का भी बहुत ही अहम और सस्पेंस से भरा रोल है। डॉ अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि अमित मिश्रा को उन्होंने अपने मेडिकल सेंटर पर मेडकल कार्यों में सहयोग हेतु रखा हुआ था। एक दिन अमित इस महिला को ले आया और कहा कि इनको यहीं बगल में कमरा दिलाया है। आज रात यह यहाँ रहेंगी कल वहां शिफ्ट हो जायेंगी। मैनें सोचा एक ही दिन की बात है इसलिये हामी भर दी पर अगले दिन देखा तो वह महिला वहीं थी मैनें अमित से जब कहा तो वह आज कल आज कल कह कर मुझे टालता रहा। मामला मेरी समझ में नहीं आ रहा था। कल जब मैंने सख्ती के साथ उसे यहाँ से जाने के लिये कहा तो वह महिला झूठ मूठ का अपने लड़के के साथ मारपीट और मेडिकल सेंटर में खुद की पार्टनर्शिप की बात कहने लगी। जबकि उसकी सारी बातें झूठी हैं। मैं उस महिला को जानता भी नहीं। वह महिला हैं यह सोचकर आज तो मैं एव्याड कर गया पर आगे वह कोई झूठा आरोप मुझ पर लगातीं हैं तो मजबूरन मुझे कानूनी कारवाई के लिये विवश होना पड़ेगा।







