डॉक्टर्स डे स्पेशल : खुद कोरोना से लडे, अपनी जान जोखिम में डाल दूसरों का जीवन बचाया, एसटीएच के कई डॉक्टर कोरोना की चपेट में आएं इसके बाद भी अपनी जिम्मेदारी संभाली ….

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हल्द्वानी। कोरोना काल में एकमात्र डॉक्टर ऐसे रहे जो खुद संक्रमित होने के बाद भी दूसरों का जीवन बचाने के लिए जीजान से जुटे रहे। सुशीला तिवारी अस्पताल के मेडिसिन विभाग के फैकल्टी से लेकर जूनियर रेजीडेंट भी कोरोना की चपेट में आए। वे जिस वार्ड में भर्ती थे वहां के रोगियों को हौसला देने से लेकर जरूरत पड़ने पर इलाज भी करते रहे। जैसे ही वह पूरी तरह ठीक हुए तो ड्यूटी पर डट गए।
कोरोना की दूसरी लहर में सुशीला तिवारी अस्पताल के करीब सभी बेड भर गए थे। मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसआर सक्सेना कहते हैं कि विभाग के डॉ. मकरंद, डॉ. एससी जोशी, डॉ. परमजीत सिंह कोविड पॉजिटिव हुए। डॉ. यतिंद्र की भी तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। 24 जेआर में 18 जेआर कोरोना की चपेट में आने के बाद भर्ती हुए।

अवकाश नहीं लिया, जरूरी होने पर ही ली छुट्टी
हल्द्वानी। कोरोना काल में कई डॉक्टर थे जिन्होंने अवकाश नहीं लिया। कुछ जरूरी होने पर छिटपुट अवकाश लेकर काम पर लौट आए। कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. साधना अवस्थी कहती हैं कि विभाग के पास कोविड केयर सेंटर में भर्ती मरीजों के इलाज से लेकर दूसरी जिम्मेदारी थी। यहां तैनात अधिकतर डॉक्टरों ने अवकाश नहीं लिया। वे इलाज के अलावा विभाग की स्टडी, जागरूकता कार्यक्रम में जुटे रहे। मेडिसिन विभाग के डॉ. एसआर सक्सेना कहते हैं कि करीब अस्सी प्रतिशत रेजीडेंट डॉक्टरों ने अवकाश नहीं लिया।
फोन के जरिए भी मदद का प्रयास किया
हल्द्वानी। डॉक्टरों ने फोन पर रोगियों को परामर्श देकर उनकी मुश्किल और परेशानी को दूर करने की कोशिश की। एलोपैथिक, आयुर्वेद और होम्योपैथ के चिकित्सकों ने फोन नंबर और समय दोनों जारी किए। इन नंबरों पर बड़ी संख्या में लोगों की कॉल पहुंची। मनौविज्ञानिकों ने भी नंबर जारी कर लोगों को सुविधाएं दीं।

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