राष्ट्रीय राजमार्ग 109 में अगर आप सफर कर रहे हैं तो हो जाइए सावधान! क्योंकि इन दिनों अत्यधिक बरसात होने के कारण सड़क में हुए जानलेवा गड्ढे बरसात के पानी से पढ़ चुके हैं। जिससे हर वक्त हाईवे में एकाएक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों के साथ- साथ सम्मानित जनप्रतिनिधि इनकी सुध लेने को तैयार नहीं है और किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठे हुए हैं। ऐसे में अगर इन गड्ढों की वजह से कोई व्यक्ति अपनी जान गवाता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा यह सोचनीय विषय है!
अगर आप हल्द्वानी से लालकुआं की ओर सफर कर रहे हैं तो सड़क में कई जगह यह जानलेवा गड्ढे बने हुए हैं, इनमें से प्रमुख रूप से बरेली रोड़ में गांधी स्कूल से नीचे उजाला नगर के पास, तीनपानी बायपास रोड से 100 मीटर लालकुआं की ओर सड़क में जानलेवा गड्ढे, गोरापडाव चौराहे के पास क्षतिग्रस्त सड़क, मोतीनगर चौराहे के पास दर्जनों गड्ढे, मोटाहल्दू चौराहे के पास क्षतिग्रस्त सड़क, बेरिपडाव से हल्द्वानी की ओर 50 मीटर पहले क्षतिग्रस्त सड़क, इसके साथ ही लालकुआं से पंतनगर की ओर जगह- जगह सड़क टूटी हुई है जो बड़े-बड़े गड्ढो में तब्दील हो चुकी है। लेकिन कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति इसकी सुध लेने को तैयार नहीं है।
बॉक्स। राष्ट्रीय राजमार्ग 87/109 रामपुर टू काठगोदाम हाईवे की हालत खस्ता है। सड़क पर बने गड्ढे हादसों का सबब बन रहे हैं। इससे एक तरफ जहां वाहन क्षतिग्रस्त होते हैं वहीं हादसों की वजह भी बन रहे हैं। खस्ताहाल सड़कों से वाहन गुजरने को विवश हैं। गड्ढों में हिचकोले खाते वाहन अक्सर दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। सड़क पर गड्ढों में गिरकर जहां वाहन क्षतिग्रस्त होते हैं वहीं कई बार सड़क में बने गहरे गड्ढे जानलेवा भी साबित हुए हैं। गड्ढों से बचने के लिए दोपहिया व चौपहिया वाहन कट मारकर चलते हुए वाहनों की भिडंत होती है, जिसमें वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ जनहानि भी होती हैं। हाइवे की हालत अत्यंत खराब है। 15 किलोमीटर का सफर 45 मिनट से अधिक समय में पूरा होता है। वाहन चालकों को दुर्घटना से बचने के लिए इन गड्ढे युक्त राज्यमार्गो से गुजरने के लिए सावधानी बरतने की जरूरत हैं। वाहनों की गति कम रखी जाए ताकि किसी भी दशा में वाहन आसानी से कंट्रोल हो जाए।
बॉक्स। राष्ट्रीय राजमार्ग हलद्वानी से लालकुंआ के मध्य हर चौराहे पर जगह-जगह बने ये गड्ढे दिन प्रतिदिन विकराल रूप ले रहे है। इससे कई दुपहिया वाहन क्षतिग्रस्त भी हो चुके है। मजे की बात तो यह है कि संबंधित विभाग इन गड्ढों को भरने की ही जहमत नहीं उठा रहा। ऐसे में यह कहना गलत नहीं कि विभागीय अधिकारियों को शायद इन गड्ढों से शायद किसी हादसे का इंतजार है? मोटाहल्दू चौराहे पर बने इन गड्ढों से बड़े वाहनों के लिए भी समस्या बढ़ गई है। ऐसे में छोटे वाहनों के चालकों की परेशानी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। संबंधित विभाग की ओर से इस तरफ ध्यान न दिए जाने से गड्ढों का आकार बढ़ता जा रहा है। रात के समय इन गड्ढों के कारण कई दुपहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो चुके है। विभागीय उपेक्षा के कारण दिन प्रतिदिन खतरनाक रूप ले रहे है। यह समस्या ऐसी भी नहीं कि विभागीय अधिकारियों का इस पर ध्यान न जाए, लेकिन जिस तरह इन गड्ढों का आकार बढ़ रहा है उससे जहां हादसों की आशंका आए दिन प्रबल हो रही है तो दूसरी ओर विभागीय लापरवाही भी साफ जाहिर होती है।








