पूर्णिया : पत्रकार की जमीन पर भूमि माफियाओं का अवैध कब्जा, ढाह दिया मकान

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पूर्णिया । जिले में भू माफियाओं का फन इतना बढता जा रहा है कि आमलोगों की बात तो छोड़े पत्रकारों की संपत्ति भी अवैध कब्जा करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिसका जीवांत उदाहरण है पूर्व में रहे आकाशवाणी एवं पीटीआई के संवाददाता एके डे की संपत्ति की। एके डे न सिर्फ एक सरल पत्रकार थे बल्कि अपने समय के एक प्रसिद्ध अधिवक्ता भी थे। गौरतलब है कि शहर के लाइन बाजार स्थित डाकबंगला चौराहे के निकट पत्रकार सह अधिवक्ता एके डे की अपनी मकान थी। जिसकी कीमत अभी के समय में करोडों में है। पत्रकार सह अधिवक्ता एके डे चूंकि बंगाली समुदाय से आते हैं कहीं न कहीं भू माफियाओं के मन में यह बैठी है कि बंगाली समाज को थोड़ा भय दिखाओ वह मैदान छोड़ देंगे। इसी के आधार पर इनकी जमीन को हडपने की कोशिश किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो 1993 में भागलपुर और नवादा के भू माफिया निरंजन यादव और अनिल सिंह ने पत्रकार सह अधिवक्ता एके डे की जमीन को गलत ढंग से केवाला करवाया था। फर्जीवाडे की बात पत्रकार सह अधिवक्ता एके डे के पुत्र डा राहुल कुमार डे ने कही है। अब सवाल उठता है कि जब 1993 में ही भूमि माफिया निरंजन यादव और अनिल सिंह के उक्त जमीन की खरीदारी की गयी तो अबतक उन्होंने पोजीशन क्यों नहीं लिया। जबकि दिखायी जा रही केवाला की तिथि से कई सालों के बाद तक जमीन मालिक एके डे जीवित थे। कहीं न कहीं भू माफियाओं की यह एक बडी साजिश नजर आ रही है। केवाला की तिथि के लंबे अवधि के बाद भी जब उपयुक्त भूमि माफियाओं द्वारा पोजीशन नहीं ले सका तो उन्होंने स्थानीय भूमि माफिया अवनीश साह आदि के हाथों केवाला कर दिया। उक्त केवाला के आधार पर उक्त जमीन को अवनीश साह व उनके भूमि माफिया साथियों के द्वारा कब्जा करने की कोशिश किया जा रहा है। यहाँ तक कि अपनी दबंगई दिखाते हुए रातोंरात बुल्डोजर लगाकर मकान ढाहने का कार्य भी किया गया। बताते चलें कि उक्त मकान में हाल तक एफटीआई कार्यालय भी अवस्थित थी। जिसका किराया हाल तक जमीन मालिक एके डे के पुत्र डा राहुल कुमार डे को जाता रहा। वर्तमान में डा राहुल कुमार डे कोलकाता में रह रहे हैं। आज से कुछ दिन पहले एफटीआई के द्वारा वह मकान खाली किया गया। मकान खाली होते ही अवनीश साह अपने साथियों के द्वारा उक्त जमीन को खाली कराने का प्रयास कर रहे हैं। उक्त जमीन के विवाद को लेकर जैसे ही पत्रकार सह अधिवक्ता एके डे के पुत्र डा राहुल कुमार डे को ज्ञात हुआ उन्होंने सिविल कोर्ट में एक मामला दायर किया जो आज भी विचाराधीन है। अब सवाल उठता है कि जब मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है तो फिर उक्त मकान को रातोरात कैसे ढाहा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए डा राहुल कुमार डे ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर इस बाबत पूरी जानकारी दिया और न्याय की गुहार लगाई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए अपने प्रधान सचिव को इस मामले में पूरी तरह से जांच कर हस्तक्षेप करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेशानुसार प्रधान सचिव ने स्थानीय जिला प्रशासन को इस मामले को देखकर जांच का आदेश दिया। अब सवाल उठता है कि जब जिला प्रशासन को इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए निगहबानी का आदेश दिया गया तो इसके बावजूद भी भूमि माफियाओं ने कैसे मकान को रातोरात ढाह दिया
गया। भूमि माफियाओं का इस तरह का बढा मनोबल कहीं न कहीं प्रशासनिक शिथिलता को भी दर्शाता है।

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