रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष शुरू हुए अब चार साल से ज्यादा का समय हो चुका है। इस जंग में अब तक रूस ने यूक्रेन के कई इलाकों पर कब्जा भी कर लिया है। हालांकि, जैसे-जैसे युद्ध के दिन बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे रूस की कब्जे वाले इलाकों में नियंत्रण छूटने की बातें भी सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं रूस को सैनिकों और जरूरी आपूर्तियों का भीषण नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
रूसी हमलों से निपटने के लिए क्या तरकीब आजमा रहा यूक्रेन?
रूस के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से हुए विनाशकारी नुकसान से उबरने के लिए यूक्रेन रक्षात्मक, आक्रामक और रणनीतिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।
1. रूस के अंदर घुसकर जवाबी हमले की रणनीति
रूस की सैन्य रसद और अर्थव्यवस्था पर चोट करने के लिए यूक्रेन ने एक असममित रणनीति पनाई है, जिसके तहत वह लंबी दूरी के ड्रोनों का उपयोग करके सीधे रूस की तेल रिफाइनरियों, डिपो और ऊर्जा ठिकानों को नष्ट कर रहा है। इसके अलावा, यूक्रेन लगातार अमेरिका और यूरोपीय देशों पर दबाव डाल रहा है कि उसे रूस के अंदर स्थित सैन्य ठिकानों (जहां से हमले किए जाते हैं) पर लंबी दूरी के हथियारों से हमला करने की इजाजत दी जाए।
2. वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करना
हमलों को रोकने के लिए यूक्रेन पश्चिमी देशों से हासिल उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों, जैसे- अमेरिका के पैट्रियट और जर्मनी के आईरिस-टी डिफेंस सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। हाल ही में हुए भारी हमलों के दौरान, यूक्रेन ने रूसी क्रूज मिसाइलों को रोकने के लिए पहली बार अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों का भी सफलतापूर्वक उपयोग किया है।
3. बुनियादी ढांचे की तुरंत मरम्मत और विकेंद्रीकरण
यूक्रेनी इंजीनियर क्षतिग्रस्त पावर ग्रिड और संयंत्रों की मरम्मत के लिए लगातार युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। भविष्य के हमलों के प्रभाव को कम करने के लिए, यूक्रेन अब अपनी ऊर्जा ग्रिड को विकेंद्रीकृत करने पर ध्यान दे रहा है। इसके लिए पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों की ओर रुख किया जा रहा है, क्योंकि बड़े पावर प्लांट्स की तुलना में इन्हें बमबारी से निशाना बनाना ज्यादा मुश्किल है।
4. ऊर्जा का आयात और फ्लोटिंग पावर प्लांट
बिजली के संकट से निपटने के लिए यूक्रेन यूरोपीय संघ (ईयू) से बिजली का आयात कर रहा है, जिसमें हंगरी उसका सबसे बड़ा भागीदार है। इसके अलावा यूक्रेन ने समुद्र में तैरते बिजलीघरों के जरिए बिजली आपूर्ति प्राप्त करने के लिए तुर्किये की कंपनी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
5. ऊर्जा की बचत और अंतरराष्ट्रीय मदद
सर्दियों के दौरान बिजली की कमी को दूर करने के लिए पूरे देश में 5 करोड़ एलईईडी लाइटबल्ब बांटने का अभियान चलाया गया है, जिससे लगभग 1 गीगावाट तक बिजली बचाई जा सकेगी। इसके अलावा जेनरेशन ऑफ होप अभियान के तहत यूरोपीय शहरों से सैकड़ों जनरेटर मंगाए गए हैं और विश्व बैंक और अन्य संस्थाओं से बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए करोड़ों डॉलर का वित्तीय फंड प्राप्त किया गया है।





