जाट आरक्षण आंदोलन हिंसा के दौरान पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने का मामला 10 साल सीबीआई कोर्ट में चला। पांच हजार पेज की चार चार्जशीट, 127 गवाह और 430 तकनीकी सबूत के बावजूद अदालत में सीबीआई आरोप साबित नहीं कर सकी।
सीबीआई की पंचकूला स्थित विशेष कोर्ट ने 56 आरोपियों को बरी कर दिया। पूर्व वित्तमंत्री के भतीजे रोहित राज सिंधु ने एफआईआर नंबर 118 में आरोप लगाया था कि भीड़ ने कोठी में घुसकर आग लगा दी। साथ ही तोड़फोड़ की। सामान भी उठाकर ले गए।

अर्बन एस्टेट थाने में पुलिस ने 27 फरवरी 2016 को एफआईआर दर्ज की। 16 अक्तूबर 2016 को भाजपा की तत्कालीन मनोहर लाल सरकार ने केस सीबीआई को सौंप दिया। उस समय तक एसआईटी पहली चार्जशीट अदालत में दाखिल कर चुकी थी। उसमें 130 लोगों को गवाह बनाया गया। इसके बाद सीबीआई ने तीन और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।
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हिंसा से फैसले तक
17 फरवरी 2016 जांच रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल से भरे कैन पहले ही खरीदकर रख लिए गए थे।
19-20 फरवरी 2016 रोहतक स्थित पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी।
मामले की प्रारंभिक जांच रोहतक पुलिस ने की।
बाद में हरियाणा सरकार ने सीबीआई को जांच सौंपी।
सीबीआई ने आरोप पत्र में 60 लोगों को आरोपी बनाया।
आरोपियों में जाट नेता अशोक बल्हारा, राहुल दादू, मनोज दूहन, जगपाल उर्फ जग्गा, धर्मेंद्र हुड्डा सहित अन्य शामिल।
अधिकांश आरोपी रोहतक और झज्जर के निवासी।
मामला पंचकूला स्थित सीबीआई विशेष अदालत में चला।
सुनवाई के दौरान बयान दर्ज करने वाले चार जजों का साथ तत्कालीन रोहतक डीसी डीके बेहरा, तत्कालीन एसपी और सीबीआई एसपी के भी बयान दर्ज।









