पश्चिम एशिया संकट- ईरान में बम फटने से 14 सैनिकों की मौत, UN चीफ बोले- प. एशिया संकट की कीमत चुका रही मानवता

श्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुई जंग फिलहाल युद्धविराम की छांव में है। पर्दे के पीछे से अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत के प्रयास किए जा रहे हैं। इस बीच ईरान के जंजन शहर के पास बम फटने से रिवोल्यूशनरी गार्ड के 14 सदस्यों की मौत हो गई। ये बम युद्ध के समय के थे जो उस वक्त नहीं फटे थे। सात अप्रैल को हुए युद्धविराम के बाद यह सबसे बड़ा हादसा है।

 

हिजबुल्लाह के ड्रोन को इस्राइल ने हवा में ही किया ढेर

इस्राइली सेना ने उत्तरी इस्राइल को निशाना बनाकर लेबनान से भेजे गए हिजबुल्लाह के कई ड्रोन मार गिराए हैं। सेना के अनुसार, कम से कम चार ड्रोन लॉन्च किए गए थे। इनमें से दो ड्रोन गैलिली और गोलन हाइट्स में सायरन बजने के बाद नष्ट कर दिए गए। ये ड्रोन इस्राइली सीमा में दाखिल नहीं हो पाए थे। इसके तुरंत बाद दो और संदिग्ध ड्रोन इस्राइली हवाई क्षेत्र में घुसने से पहले ही रोक दिए गए। इस दौरान सायरन नहीं बजा।

इसके अलावा, आईडीएफ ने कहा कि किरयात शमोना के पास रॉकेट हमले की सूचना मिलने पर उन्होंने इंटरसेप्टर मिसाइलें दागीं। इन हमलों के परिणामों की अभी समीक्षा की जा रही है। इस्राइली सेना इन सभी घटनाओं की बारीकी से जांच कर रही है। युद्धविराम की शर्तों के बावजूद इस्राइल और लेबनान की सीमा पर तनाव लगातार बना हुआ है। सेना हर खतरे से निपटने के लिए अलर्ट पर है।

 

अमेरिका ने मध्य-पूर्व के सहयोगियों को $8.6 अरब के हथियार बेचने की मंजूरी दी

अमेरिकी ने मध्य-पूर्व के अपने प्रमुख सहयोगियों- जिनमें इस्राइल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं को 8.6 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य हथियार बेचने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ईरान के साथ अमेरिका और इस्राइल का टकराव अपने नौवें हफ्त में प्रवेश कर चुका है, और तीन हफ्तों से अधिक समय से एक नाजुक संघर्ष-विराम जारी है।

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अमेरिका ने जर्मनी से 5,000 सैनिक वापस बुलाने का दिया आदेश

अमेरिका ने जर्मनी से अपने 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश दिया है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर यूरोपीय सहयोगियों के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह फैसला लिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस कदम को मंजूरी दे दी है। पेंटागन का कहना है कि अगले 6 से 12 महीनों के भीतर सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच हुई तीखी बहस के बाद आया है। ईरान युद्ध को संभालने के तरीके और शांति वार्ता रुकने को लेकर दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि नाटो (NATO) के भीतर भी आपसी मतभेद गहरा रहे हैं। जर्मनी सहित कुछ यूरोपीय देश ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्रायल की सैन्य कार्रवाई में शामिल होने का विरोध कर रहे हैं।

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