उत्तरकाशी आपदा अपडेट: हेली से रेस्क्यू नहीं हुआ शुरू, लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ा, तलाश जारी

Spread the love

 

राली आपदा को एक सप्ताह का समय बीत गया है। भीषण आपदा से मलबे में दफन धराली बाजार में लापता लोगों की तलाश में सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के जवान बचाव व राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। मौसम रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा बन रहा है। प्रशासन ने 42 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है, जबकि एक लापता का शव बरामद हुआ है।

 

आपदा के एक सप्ताह बाद भी कारण स्पष्ट नहीं

आपदा के लिए संवेदनशील उत्तराखंड राज्य में धराली आपदा ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। स्थिति यह है कि घटना के एक सप्ताह बाद भी अभी तक आपदा के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल पाया है।

आपदा से पहले ही पूरा गांव खाली करा दिया गया

आल्प्स पर्वत का एक विशाल ग्लेशियर का हिस्सा टूट गया जिससे हजारों टन बर्फ, कीचड़ और चट्टानों का सैलाब गांव की ओर बह आया। जिसमें स्विटजरलैंड का ब्लैटिन गांव जलमग्न हो गया लेकिन यहां अर्ली वार्निंग सिस्टम के चलते आपदा से पहले ही पूरा गांव खाली करा दिया गया था। भेड़ों और यहां तक कि गायों को भी हेलिकॉप्टर से निकाला गया था। प्रो. बिष्ट ने कहा कि धराली आपदा के बाद शासन को अर्ली वार्निंग सिस्टम के प्रति गंभीर होना होगा। अन्यथा भविष्य में और भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

2021 को ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा में आई थी बाढ़

सात फरवरी 2021 को ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा में बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ में ऋषिगंगा और तपोवन हाईड्रो प्रोजेक्ट पूरी तरह ध्वस्त हो गए थे। ऋषिगंगा ऊर्जा परियोजना में काम करने वाले 200 से अधिक मजदूर व अन्य लापता हो गए थे। घटना के बाद प्रदेश के वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक व गढ़वाल केंद्रीय विवि के भूगर्भ विभागाध्यक्ष प्रो. एमपीएस बिष्ट सहित अन्य भू-वैज्ञानिकों ने नदी घाटी परियोजनाओं के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में श्रृंखलाबद्ध अर्ली वार्निंग सिस्टम (एवीएस) लगाए जाने की बात पर जोर दिया था।

और पढ़े  रुद्रप्रयाग- गुप्तकाशी के पास खाई में गिरी बाइक, सवार तीनों घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया

ऋषिगंगा की आपदा के बाद भू-वैज्ञानिकों ने अर्ली वार्निंग सिस्टम बताया था जरूरी, नहीं हुई कोई पहल

भू-वैज्ञानिक लंबे समय से राज्य में नदी परियोजना क्षेत्रों के ऊपरी जल ग्रहण क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने के लिए आगाह कर रहे हैं। 2021 में ऋषिगंगा आपदा के बाद भू-वैज्ञानिकों ने इसका पुरजोर समर्थन किया था लेकिन शासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। राज्य में अर्ली वार्निंग सिस्टम की सुविधा होती तो शायद धराली आपदा में जनहानि का आंकड़ा कुछ और होता।

लापता लोगों में धराली गांव का एक चार वर्षीय मासूम

आपदा ग्रस्त धराली में पुलिस हेल्प डेस्क ने स्थानीय स्तर पर लापता लोगों की सूची तैयार की है। इसमें 73 लापता लोगों के नाम हैं। पांच लापता नेपाली मजदूरों से संपर्क हो चुका है। अमर उजाला ने भी पहले दिन ही आपदा में लापता लोगों का आंकड़ा लगभग 70 बताया था। अब खोजबीन के बाद प्रशासन के आंकड़े भी इसके आसपास पहुंच रहे हैं। लापता लोगों में धराली गांव के एक चार वर्षीय मासूम के साथ ही आठ लोगों के नाम हैं। वहीं नेपाल के एक 18 वर्ष के मासूम के साथ ही नाबालिग का नाम भी दर्ज किया गया है।

आठ जगहों पर दिए कैडेवर डॉग्स ने संकेत, खोदाई हुई तो निकला पानी

धराली में ग्राउंड जीरो पर एनडीआरएफ के कैडेवर डॉग्स (शव खोजी कुत्ते) ने आठ जगह सूंघकर संकेत दिए। यहां खोदाई शुरू हुई तो नीचे से पानी निकल आया, जिससे वहां काम रोकना पड़ा। अब यहां ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) से ग्राउंड जीरो की स्कैनिंग की जा रही है। इस राडार की तरंगों से मलबे में दबे भवनों की खोज की जाएगी। इसके बाद जहां से सही दिशा में संकेत मिलेंगे वहीं पर खोदाई की जाएगी।

Spread the love
  • Related Posts

    रुड़की – गुरुकुल नारसन के टिकौला कलां गांव में नाले में मिला युवक का शव

    Spread the love

    Spread the loveरुड़की में गुरुकुल नारसन क्षेत्र के टिकौला कलां गांव में आज एक युवक का शव नाले में पड़ा मिला है। युवक की पहचान कपिल(40) पुत्र मेघवाल निवासी टिकौला कलां के…


    Spread the love

    हरिद्वार में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर मंथन: कार्यक्रम में पहुंचे सीएम धामी, शिवराज-रामदेव और संत समाज भी मौजूद

    Spread the love

    Spread the loveहरिद्वार में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर संत समाज की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। ज्वालापुर मार्ग स्थित श्रीजी वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में…


    Spread the love