उत्तराखंड: विवाद होंगे कम, बनेगा शहरी-आबादी क्षेत्रों की जमीनों का पुख्ता डिजिटल रिकॉर्ड, लागू होगी नियमावली

सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण आबादी क्षेत्रों की भूमि को आधुनिक तकनीक से लैस करने और संपत्ति के पुख्ता रिकॉर्ड तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसके तहत उत्तराखंड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली 2026 को मंगलवार को धामी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

केंद्र के भूमि संसाधन विभाग (ग्रामीण विकास मंत्रालय) ने 25 सितंबर 2024 को डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत नक्शा (राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण) कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहरी भू-अभिलेखों के निर्माण और प्रबंधन प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। इसी तर्ज पर अब उत्तराखंड में भी यह आधुनिक सर्वेक्षण प्रणाली लाई जा रही है।

इस नियमावली के लागू होने के बाद, प्रदेश के राजस्व अभिलेखों में दर्ज आबादी क्षेत्रों में भूमि का आधुनिक विधि से सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें हवाई सर्वेक्षण (ड्रोन आदि के माध्यम से), जमीनी सर्वेक्षण और उन्नत जीआईएस तकनीक का एकीकरण किया जाएगा, जिससे अत्यंत सटीक भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार हो सकेगा।

 

ये होंगे लाभ

स्वामित्व योजना जैसा लाभ : जिस प्रकार गांवों में स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति के डिजिटल और पुख्ता रिकॉर्ड मिल रहे हैं, उसी प्रकार इस नई नियमावली से शहरी और आबादी क्षेत्रों के लोगों को उनकी संपत्ति के स्पष्ट और कानूनी दस्तावेज मिल सकेंगे।

पारदर्शी लेन-देन और कम विवाद : संपत्ति के सटीक भू-स्थानिक डेटा होने से खरीद-फरोख्त (लेन-देन) की प्रक्रिया बेहद आसान, पारदर्शी और निश्चित हो जाएगी, जिससे भूमि विवादों में कमी आएगी।

बेहतर शहरी नियोजन : सटीक डेटा मिलने से सरकार और स्थानीय प्रशासन को बेहतर निर्णय लेने, भूमि उपयोग की सही योजना बनाने और भविष्य के विकास कार्यों को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

और पढ़े  हरिद्वार में भारी ओलावृष्टि: मची अफरा तफरी, ओले गिरने से कई गाड़ियों के शीशे टूटे, जान बचाने के लिए भागे लोग

भू-स्वामियों को मिलेगा प्रॉपर्टी कार्ड

वर्तमान में उत्तराखंड में अल्मोड़ा, नरेंद्र नगर, किच्छा और भगवानपुर नगर पालिका में भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने कार्य किया जा रहा है। इसमें ड्रोन सर्वे, भू सत्यापन अभिलेखों का परीक्षण आदि चरण हैं। इसके बाद संबंधित भू-स्वामियों को नोटिस देते हुए उनका पक्ष लिया जाना है। राजस्व परिषद के अधिकरियों के अनुसार, इसके बाद प्रकरणों की सुनवाई के बाद प्रॉपर्टी कार्ड जारी होंगे। अब नियमावली बन जाने से यह प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इसके बाद अन्य जगहों पर भी जब भूमि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

  • Related Posts

    उत्तराखंड: उत्तरकाशी और यमुनोत्री घाटी में भूकंप के तेज झटके, कंपन महसूस होते ही घरों से बाहर भागे लोग

    उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय और यमुनोत्री घाटी में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का झटका महसूस होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। यमुनोत्री घाटी के खरसाली…

    ज्योतिर्मठ- हेमकुंड साहिब के कपाट बंद: बर्फबारी के बीच साल की अंतिम अरदास, ऐतिहासिक पल के साक्षी बने श्रद्धालु

    सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट आज शनिवार को साल की अंतिम अरदास के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस वर्ष धाम में रिकॉर्ड 3,84,573 से…