ट्रंप- ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह तबाह,ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे

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मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के नाम संबोधन में सबसे पहले नासा को और आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों को बधाई दी है। इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना पूरी तरह खत्म हो गई है। इस दौरान उन्होंने फिर दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। ट्रंप का यह संबोधन ऐसे समय पर हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध लगातार गंभीर होता जा रहा है और इसका असर वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है।

 

अमेरिकी सेना की जमकर की तारीफ
ट्रंप ने कहा कि पिछले चार हफ्तों में, हमारी सेनाओं ने युद्ध के मैदान में तेज, निर्णायक और जबरदस्त जीत हासिल की है, ऐसी जीत, जो बहुत कम लोगों ने पहले कभी देखी होगी।’ ट्रंप ने कहा ‘उनके मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की उनकी क्षमता में भारी कमी आई है और उनकी हथियारों की फैक्टरियां, रॉकेट लॉन्चर टुकड़े-टुकड़े किए जा रहे हैं; अब उनमें से बहुत ही कम बचे हैं। युद्ध के इतिहास में पहले कभी किसी दुश्मन को, महज कुछ ही हफ्तों के भीतर, इतने स्पष्ट और विनाशकारी बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं उठाना पड़ा है।’

 

 

हमने ईरान को परमाणु बम बनाने से रोका’
अपने बयान में ट्रंप ने दावा किया कि हमने ईरान को परमाणु बम बनाने से रोका है और ईरान को गलत काम की सजा मिली है। ट्रंप ने कहा- ईरान के परमाणु ठिकानों का नष्ट किया जा चुका है। इस दौरान अमेरिकी सेना की तारीफ करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर जबरदस्त हमले किए हैं। उन्होंने कहा अभी एक महीना ही हुआ है, जब अमेरिका की सेना ने ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ शुरू किया था, जिसका निशाना दुनिया का नंबर-1 आतंकी समर्थन करने वाला देश ईरान है। इन चार हफ्तों में ईरान ने युद्ध के मैदान में पूरी तरह से दबदबा बनाने वाली जीत हासिल की है।

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अमेरिका को होर्मुज की जरूरत नहीं- ट्रंप
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा उनकी मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता अब काफी हद तक घट गई है। उनके हथियार बनाने वाले कारखाने और रॉकेट लॉन्चर तबाह किए जा रहे हैं और अब बहुत कम बचे हैं। ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य की जरूरत नहीं है, दुनिया के देशों को देखना होगा कि होर्मुज को कैसे चलाना है।

पश्चिम एशिया में जंग की शुरुआत
इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त अभियान से हुई थी, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल ताकत को खत्म करना था। शुरुआती हमलों में ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसके बाद उनके बेटे को नया नेता बनाया गया। हालांकि, इसके बाद ईरान ने तेज और आक्रामक जवाबी हमले किए, जिससे अमेरिका की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए।


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