भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) इस साल के अपने आखिरी मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर इतिहास रच दिया । 24 दिसंबर (बुधवार) को भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेस मोबाइल के एक अहम सैटेलाइट को अंतरिक्ष में लॉन्च कर दिया है। एलवीएम3-एम6 मिशन के जरिए अमेरिकी कंपनी के कम्युनिकेशन सैटेलाइट ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाना है। यह इस रॉकेट की छठी ऑपरेशनल उड़ान (एलवीएम3-एम6) है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर इसरो का ये मिशन क्या है? कैसे भारत के लिए यह बड़ी उपलब्धि बनेगा? जिस मिशन का भारत ने बीड़ा उठाया है, वह सैटेलाइट क्यों खास है? कैसे इसरो की मदद से आने वाले समय में अमेरिकी कंपनी मोबाइल नेटवर्क का पूरा स्वरूप बदल सकती है और स्टारलिंक जैसी कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती है? …
पहले जानें- क्या है इसरो का मिशन, क्या इतिहास बनाने की तैयारी?
इसरो के इस मिशन का नाम एलवीएम3-एम6 ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 (LVM3-M6 / BlueBird Block-2) है। यह पूरी तरह से कॉमर्शियल लॉन्चिंग है। यह मिशन अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लोअर अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने के लिए है। इसरो इसकी लॉन्चिंग के लिए अपने एलवीएम3 रॉकेट का इस्तेमाल करेगा, जो कि इस लॉन्च व्हीकल की छठवीं उड़ान होगी और वाणिज्यिक मिशन के लिए तीसरी। भारत के इस लॉन्च व्हीकल को पहले ही इसकी क्षमताओं के लिए ‘बाहुबली’ नाम दिया जा चुका है।
कैसे भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बनेगा यह मिशन?
भारत के लिए यह एक अहम मिशन है, क्योंकि लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम3) रॉकेट की छठी उड़ान सफल होने से कमर्शियल स्पेस सेक्टर में भारत की पकड़ और मजबूत होगी। ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह का वजन लगभग 6,500 किलोग्राम है। भारतीय लॉन्च व्हीकल अगर इस मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देता है तो यह पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होने वाला सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह होगा।








