देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में 4.50 करोड़ छात्र पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन इन छात्रों के लिए हॉस्टल सीटों का कोई केंद्रीय डाटा उपलब्ध नहीं है। सत्य निकेतन पीजी हादसे के बाद छिड़ी देशव्यापी बहस के बाद अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि देश के 1,278 विश्वविद्यालयों में से सिर्फ 1,069 में ही हॉस्टल की सुविधा है। इनमें भी सभी छात्रों को हॉस्टल नहीं मिल पाता। उच्च शिक्षण संस्थानों में कितने छात्रों को हॉस्टल मिल पाता है और कितने बाहर रहने के लिए मजबूर हैं, इसका डाटा किसी के पास नहीं है।
जामिया : हालात बुरे
दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 20 से 22 हजार छात्र हैं और हॉस्टल में फिलहाल चार हजार छात्रों के रहने की व्यवस्था है। आधे से अधिक छात्र कैंपस से बाहर रहते हैं। जिसमें पीजी की संख्या अधिक हैं। हालांकि, कई छात्र घरों से भी आते हैं।
एएमयू : आधे छात्र कैंपस से बाहर
डेढ़ सौ साल पुराने ऐतिहासिक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी यही हाल है। यहां तीन कैंपस में करीब 39 हजार छात्र पढ़ते हैं। 18 हजार के लिए हॉस्टल उपलब्ध है।
जेएनयू : स्थानीय को छोड़ अन्य सभी को हॉस्टल
सबसे बेहतर स्थिति जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की है। यहां 8,800 छात्र पढ़ते हैं। दिल्ली के स्थानीय छात्रों को छोड़कर अन्य सभी छात्रों को हॉस्टल सुविधा मिल जाती है।
आरोपियों को दो दिन के रिमांड पर भेजा
दिल्ली की कोर्ट ने हॉस्टल डेज पीजी गिरने के मामले में बिल्डिंग मालिक के बेटे महेश, पीजी संचालक सुधांशु और लेबर ठेकेदार सनोज को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। सुधांशु बुधवार को ही गिरफ्तार हुआ। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज ने आरोपियों के अनुरोध पर बंद कमरे में कार्यवाही की। आरोपियों का कहना था कि उनका मीडिया ट्रायल हो रहा है।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) कैंपस में करीब 35,000 छात्र हैं और 72 हॉस्टल में 16,566 सीट हैं। अन्य छात्र बाहर रहते हैं।
एचएनबीजीयू: बेटियों को प्राथमिकता
हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय उत्तराखंड के चारकैंपस पौढ़ी, टिहरी, श्रीनगर और चौरास कैंपस में करीब 14 हजार विद्यार्थी हैं। इनमें से 1,530 हॉस्टल में रहते हैं। बेटियों को प्राथमिकता दी जाती है।






