राहत: श्रमिकों के पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस में होगी वृद्धि, नए श्रम कानून मई में लागू होंगे

Spread the love

श्रम कानूनों को सरल बनाकर श्रमिकों के काम के घंटे, वेतन, पीएफ और ग्रेच्युटी में बदलाव होगा। श्रमिकों को न्यूनतम सुरक्षा भी मिलेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य स्तर पर नियमों का मसौदा अधिसूचित कर हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए इसे सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है। मिले सुझावों के आधार पर अंतिम नियमों को मई में अधिसूचित किया जाएगा।

 

नई श्रम व्यवस्था के तहत 29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को समाप्त कर चार संहिताओं वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 में समाहित किया गया है। इसके तहत सबसे बड़ा बदलाव वेतन की परिभाषा में किया गया है।

कर्मचारी के कुल वेतन (सीटीसी) का कम से कम 50 फीसदी हिस्सा मूल वेतन माना जाएगा। इससे पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस जैसी देनदारियों में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा अब प्रबंधकीय और सुपरवाइजरी कर्मचारी भी कानूनी सुरक्षा के दायरे में आएंगे, जबकि ठेका श्रमिकों की जिम्मेदारी भी प्रमुख नियोक्ता पर तय की गई है। 

सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन अनिवार्य

प्रदेश में नई श्रम व्यवस्था के तहत 29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को समाप्त कर चार संहिताओं में समाहित किया गया है। वेतन संहिता के तहत पहली बार सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य किया गया है। केंद्र सरकार फ्लोर वेज तय करेगी, जिससे नीचे राज्य वेतन निर्धारित नहीं कर सकेंगे।

और पढ़े  16 अगस्त को अलवर आएंगे गृह मंत्री शाह, 700 करोड़ की योजनाओं की देंगे सौगात, बारिश से बदला जनसभा स्थल

वेतन का भुगतान हर महीने सात तारीख तक अनिवार्य होगा। ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान करना होगा। समान कार्य के लिए समान वेतन (लिंग, जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव समाप्त) होगा। छंटनी और हड़ताल के नए नियम होंगे।

इसके तहत 300 या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को ही छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी। पहले यह सीमा 100 थी।

दुर्घटना भी कार्य से जुड़ी मानी जाएगी
नई सामाजिक सुरक्षा संहिता में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों (जैसे डिलीवरी व एप आधारित कामगार) को शामिल किया गया है। कंपनियों को 1-2% वार्षिक कारोबार सामाजिक सुरक्षा फंड में देना होगा। कार्यस्थल आने-जाने के दौरान दुर्घटना भी कार्य से जुड़ी मानी जाएगी। नई व्यवस्था में निरीक्षक की भूमिका इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर की होगी। छोटे उल्लंघनों पर पहले सुधार का मौका दिया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में जुर्माना 20 लाख रुपये तक हो सकता है। नई संहिताओं से सबसे बड़ी राहत एमएसएमई सेक्टर को मिलेगी।

ये बदलाव भी होंगे

– 300 से कम श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में नोटिस और मुआवजा जरूरी। हड़ताल से पहले 14 दिन का नोटिस जरूरी।
– 20 से अधिक श्रमिकों वाले संस्थानों में शिकायत निवारण समिति जरूरी
– छंटनी की स्थिति में ‘री-स्किलिंग फंड’ में 15 दिन का वेतन जमा करना होगा
– 8 घंटे कार्य दिवस, 48 घंटे साप्ताहिक सीमा
– 50 से अधिक ठेका श्रमिकों पर नियम लागू
– सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य
– 40 वर्ष से अधिक श्रमिकों का वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण
– महिलाओं को सभी शिफ्टों में काम की अनुमति
– सामाजिक सुरक्षा: गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिक भी शामिल।

Spread the love
  • Related Posts

    मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं’: ट्रंप ने माना तुर्किये में ट्रक में छिपकर बदला था विमान

    Spread the love

    Spread the loveअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उन्होंने कह, ‘ईरान पर भरोसा…


    Spread the love

    जिम्बाब्वे की करिबा झील में पलटी नाव, 15 की मौत, 27 अब भी लापता

    Spread the love

    Spread the loveजिम्बाब्वे की करिबा झील में क्षमता से ज्यादा यात्रियों से भरी एक नाव पलट गई। हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 27…


    Spread the love