होर्मुज में गहराएगा संकट?- पश्चिम एशिया में तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना की बड़ी तैनाती, खाड़ी पहुंचा USS बुश

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मेरिका ने ईरान के साथ भले ही संघर्षविराम को बढ़ा दिया है, लेकिन दोनों देशों के साथ तनाव बरकरार है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने गुरुवार को जानकारी दी कि यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश विमानवाहक पोत पश्चिम एशियाई क्षेत्र में पहुंच गया है। इसके साथ ही इस इलाके में तैनात अमेरिकी विशाल युद्धपोतों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।

 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया, यह कैरियर 23 अप्रैल को हिंद महासागर में उसके जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में संचालित हो रहा था। पोस्ट के साथ साझा की गई तस्वीर में एयरक्राफ्ट कैरियर के डेक पर बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान तैनात दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी सेना के अनुसार यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश विमानवाहक पोत पश्चिम एशिया पहुंच गया है, जिससे इस क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की संख्या तीन हो गई है।

यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश  अमेरिकी नौसेना का एक निमित्ज-क्लास न्यूक्लियर से चलने वाला विमानवाहक युद्धपोत है। यह इस क्लास का 10वां और अंतिम जहाज है।

वजन: लगभग 1,04,000 मीट्रिक टन
लंबाई: कुल 1,092 फी

 

  1. 2 ए4डब्ल्यू न्यूक्लियर रिएक्टर से संचालित (बिना ईंधन भरे 20–25 साल तक ऑपरेशन संभव)
  2. स्पीड: 30 नॉट से अधिक
  3. ~3,200 जहाज क्रू
    ~2,500 एयर विंग
    90 तक फिक्स्ड-विंग लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर
  4. कुल स्टाफ: 5000–6000 लोग

जब तक ईरान समझौते पर सहमत नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट पर दबदबा बनाए रखेगा : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान कोई समझौता नहीं करता, तब तक अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। उन्होंने साफ कहा कि इस अहम तेल मार्ग को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रंप ने कहा, इस पर हमारा पूरा नियंत्रण है। यह रास्ता तभी खुलेगा जब वे कोई समझौता करेंगे या फिर कोई और सकारात्मक स्थिति बनेगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस रास्ते को बंद रखने का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालना है। ट्रंप बोले, अगर हम यह रास्ता खोल देते हैं, तो ईरान रोज़ाना करीब 500 मिलियन डॉलर कमाएगा। जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, मैं नहीं चाहता कि वे इतना पैसा कमाएं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो खाड़ी के तेल उत्पादक देशों को दुनिया के बाजारों से जोड़ता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ जाती है।

और पढ़े  रूस ने दिया भारत के साथ सीधे रेल मार्ग का प्रस्ताव, क्या हो सकता है रूट; किसे-कितना फायदा?

ट्रंप ने माना कि इसका असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। ईंधन की कीमतों को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “थोड़े समय के लिए असर होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बाजार अभी स्थिर हैं। ट्रंप बोले, शेयर बाजार अपने उच्चतम स्तर पर है। मुझे लगा था कि तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और कीमतें उम्मीद से काफी अलग हैं। प्रशासन ने कहा कि देश में ज्यादा उत्पादन होने से स्थिति संभली हुई है। ट्रंप ने बताया, हम इस समय अपने इतिहास में सबसे ज्यादा तेल और गैस का उत्पादन कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, जब तक यह रास्ता बंद है, दुनिया भर से जहाज टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का आ रहे हैं, ताकि अमेरिका से तेल ले सकें। ट्रंप ने इस पूरे दबाव को सुरक्षा से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, हम उन्हें परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकते। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मामले का हल जल्दी नहीं निकलेगा। ट्रंप ने कहा, “मुझे कोई जल्दबाजी नहीं है, हमारे पास काफी समय है।” इससे साफ है कि तेल के सीमित प्रवाह के कारण ईरान पर दबाव बढ़ता जाएगा।


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