“भारत” की ताकत देखेगी दुनिया,पहली बार स्वदेशी फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी,स्वदेशी हथियारों का होगा प्रदर्शन,मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सिसी बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे।

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“भारत” की ताकत देखेगी दुनिया,पहली बार स्वदेशी फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी,स्वदेशी हथियारों का होगा प्रदर्शन,मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सिसी बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे।

ब्रह्मोस से आकाश तक किन-किन हथियारों का होगा प्रदर्शन?

आज पूरा देश 74वां गणतंत्र दिवस (Republic Day) मना रहा है। कर्तव्य पथ पर भव्य आयोजन। परेड में कुल 23 झांकियां देखने को मिलेंगी। सभी झांकियों की थीम भी अलग-अलग होगी। इसमें से ज्यादातर झांकियों की थीम नारी सशक्तिकरण को लेकर रखी गई है। 17 झांकियां देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होंगी जबकि 6 अलग सरकारी मंत्रालयों और विभागों की होंगी।

सेना के तीनों विंग परेड में अपनी शक्ति का भी प्रदर्शन करेंगे। पहली बार है जब एक साथ कई स्वदेशी हथियारों और तकनीक का भी प्रदर्शन होगा। इस मौके पर मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सिसी (Abdel Fatttah El-Sisi) बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। आइए जानते हैं कि इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में किन-किन हथियारों का प्रदर्शन होगा? इन हथियारों की क्या खासियत है?

जानिए क्या – क्या होगा गणतंत्र दिवस पर?

आज के तय कार्यक्रम के अनुसार, गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 9:51 पर नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ होगी। इसके बाद सलेयूटिंग डायस पर वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू सुबह 10:30 बजे ध्वजारोहण करेंगी। इसके बाद कर्तव्य पथ पर परेड की शुरुआत हो जाएगी।

मेजर जनरल भवनीश कुमार ने कहा कि परेड की शुरुआत दिल्ली के विजय चौक से सुबह 10:30 बजे शुरू होगी। इसके बाद सैन्य टुकड़ी लाल किले तक मार्च करती हुई जाएगी। मेजर जनरल ने आगे बताया कि इस बार के गणतंत्र दिवस समारोह में हमारा फोकस आत्मनिर्भर भारत पर है। कर्तव्यपथ पर इस बार प्रदर्शित होने वाले सभी हथियार देश में बनाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस बार सशस्त्र बल की आठ मार्चिंग टुकड़ियां शामिल होंगी। इसमें से छह थल तो एक-एक वायुसेना और नौसेना की टुकड़ी होगी। इसके अलावा पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की टुकड़ियां भी इसमें शामिल होंगी। गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 2 घंटे 14 मिनट बाद यानी दोपहर 12:05 पर होगा।

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होगा कुछ खास?

इस गणतंत्र दिवस की परेड में सिर्फ मेड इन इंडिया यानी स्वदेशी हथियारों का ही प्रदर्शन होगा। यहां तक की प्रदर्शन होने वाला गोला-बारूद भी स्वदेशी होगा। पहली बार होगा जब भारत में बनी 105 एमएम इंडियन फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। अब तक ये सलामी ब्रिटिश 21 पाउंडर गन से यह दी जाती रही है। इसके अलावा इस बार नए भर्ती हुए अग्निवीर भी परेड का हिस्सा बनेंगे। वहीं, बीएसएफ की कैमल कंटिन्जेंट के हिस्से के तौर पर महिला सैनिक भाग लेंगी और नौसेना के कंटिन्जेंट के 144 सैनिकों की लीडर भी महिला होगी।

हथियारों का होगा भी प्रदर्शन?

1. K-9 वज्र हॉविट्जर्स: गुजरात के हजीरा में लार्सन एंड टूब्रो की फैक्टरी में मेक इन इंडिया के तहत तैयार हुआ स्वदेशी K-9 वज्र तोप का प्रदर्शन भी गणतंत्र दिवस पर होगा। इसे अभी लद्दाख में चीनी सीमा पर तैनात किया गया है। इस स्वचालित तोप की मारक क्षमता 38 किलोमीटर है लेकिन पूर्वी लद्दाख में 16 हजार फीट की ऊंचाई वाले इलाकों में इसने सफलतापूर्वक 50 किलोमीटर तक की दूरी तक मार की है। के-9 वज्र स्वचालित तोप दक्षिण कोरियाई हॉवित्जर के-9 थंडर का भारतीय संस्करण है। यह तोप अपनी जगह पर चारों तरफ घूमकर हमला कर सकती है। 155 एमएम/52 कैलिबर की 50 टन वजनी इस तोप से 47 किलो का गोला फेंका जा सकता है। यह सड़क और रेगिस्तान पर संचालन के साथ 15 सेकेंड में तीन गोले दागने में सक्षम है।

MBT अर्जुन टैंक :

अर्जुन मेन बैटल टैंक यानी MBT भारतीय सेना का अहम हिस्सा है। इस स्वदेशी टैंक को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने बनाया है। ‘अर्जुन मेन बैटल टैंक’ परियोजना की शुरुआत साल 1972 में की गई थी। अब तक इसके तीन वर्जन तैयार हो चुके हैं। अर्जुन ‘Mk1’ के बाद हाईटेक तकनीक का प्रयोग करते हुए ‘Mk1A’ और फिर ‘MkII को तैयार किया गया। अर्जुन मेन बैटल टैंक में स्वदेशी रूप से विकसित 120mm राइफल और आर्मर पियर्सिंग फिन-स्टैबिलाइज़्ड डिस्करिंग सबोट (FSAPDS) युद्धोपकरण शामिल हैं। ये टैंक अपनी रेंज में आने वाली सभी तरह के टैंकों को खत्म कर सकता है। इसे कंप्यूटर के जरिए मॉनिटर किया जा सकता है।

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नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल:

नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल भी डीआरडीओ ने तैयार किया है। ये पूरी तरह से स्वदेशी मिसाइल है। इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) के तहत, तीसरी पीढ़ी की इस मिसाइल को तैयार किया गया है। यह पांच तरह के वैरिएंट्स में आती है और हर मौसम में तैनात की जा सकती है। नाग मिसाइल को 10 साल तक किसी भी तरह की मरम्मत की जरूरत भी नहीं है। सिर्फ 43 किलो वजनी यह मिसाइल 828 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम रफ्तार से दागी जा सकती है। नाग मिसाइल के अलग-अलग वैरिएंट्स की रेंज 500 मीटर से 20 किलोमीटर तक है। इसका गाइडेंस सिस्टम ‘फायर एंड फॉरगेट’ है मतलब एक बार दाग दिया तो टैंक को तबाह कर ही दम लेगी। दिन हो या रात, या फिर किसी भी मौसम में ‘नाग’ मिसाइल को दागा जा सकता है। इस मिसाइल में ऐडवांस्ड पैसिव मिसाइल होमिंग गाइडेंस सिस्टम लगा है जिससे इसे हाई सिंगल-शॉट किल प्रॉबेबिलिटी मिलती है। नाग मिसाइल 828 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से अपने टारगेट को हिट कर सकती है।

ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल :

ये एक मध्यम-श्रेणी की स्टील्थ रैमजेट सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है जिसे पनडुब्बी, जहाज, हवाई जहाज या जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। जब यह पहली बार अस्तित्व में आई थी तब दुनिया में सबसे तेज सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल बताई गई थी। यह रूस की पी-800 ओनिक्स सुपरसॉनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल पर आधारित है। इसका नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा पर आधारित है। कहा जाता है कि यह एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के रूप में दुनिया में सबसे तेज है। जमीन और जहाज से लॉन्च किए जाने वाले इसके वर्जन पहले ही सेवा में हैं। एयर लॉन्च वर्जन 2012 में सामने आया था और 2019 में उसे भी सेवा शामिल कर लिया गया था। डीआरडीओ ने इसे स्वदेशी तकनीक से तैयार किया। इसकी रेंज 800 किलोमीटर है। मतलब हवा, पानी या जमीन पर रहते हुए 800 किलोमीटर दूर भी दुश्मन के इलाके को इसके जरिए टारगेट किया जा सकता है।

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आकाश एयर डिफेंस मिसाइल :

ये अत्याधुनिक मिसाइल दुश्मनों के लिए मुसीबत का सबब है। आकाश एक स्वदशी एक्टिव रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) सीकर से लैस है। मतलब टारगेट को अच्छे से नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा यह अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में कम तापमान में भी अधिक प्रदर्शन करता है। इस मिसाइल को 4500 मीटर की ऊंचाई तक तैनात किया जा सकता है और यह 25 से 35 किलोमीटर तक की दूरी तक अपने टारगेट पर निशाना साध सकता है।

क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल्स :

ये ऐसी गाड़ियां होती हैं, जिनपर गोलियों और बम का कोई असर नहीं होता है। हाल ही में टाटा ने इसका निर्माण करके सेना को सौंपी है। इसकी डिजाइन ऐसी है, जिससे चंद सेकेंड में गाड़ी तेज रफ्तार पकड़ सकती है। ये गाड़ी काफी हल्की और मजबूत होती है। ये गाड़ियां माइन प्रोटेक्टेड आर्मर्ड व्हीकल हैं। मतलब अगर किसी ने जमीन के अंदर बारूद बिछा दिया हो, तो भी उसका इसपर कोई असर नहीं होगा। इसमें बैठे जवानों को नुकसान नहीं होगा। टाटा ने स्वदेशी तकनीक से इसे तैयार किया है।


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