नैनीताल हाईकोर्ट:- हाईकोर्ट की सख्ती का दिखा असर,जेलों में सुधरीं व्यवस्थाएं, तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने दिए थे निर्देश

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हाईकोर्ट की सख्ती से जेलों की व्यवस्थाएं सुधरने लगी हैं। बीते वर्ष हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव ने तीन जेलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं सुधारने के आदेश दिए थे। साथ ही आदेश पालन की रिपोर्ट भी मांगी थी। अब उप महानिरीक्षक कारागार ने आदेश के पालन संबंधी रिपोर्ट राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेज दी है।

 

जेलों ये मिली थीं कमियां
हाईकोर्ट के तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने 21 अक्तूबर 2024 को देहरादून, 18 दिसंबर 2024 को टिहरी और 10 नवंबर को सितारगंज जेल का निरीक्षण किया था। इस दौरान जेल की बैरकों में प्रकाश व्यवस्था, सफाई, पर्याप्त शौचालय की व्यवस्था करने, कूड़ा निस्तारण, बंदियों के इलाज की समुचित व्यवस्था करने, मनोरोग चिकित्सक से समय-समय पर बंदियों की काउंसलिंग कराने, पढ़ाई और रोजगार उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए थे। यहां निरुद्ध बंदियों के इलाज के लिए गारद तैनात करने को भी कहा गया था।

इसके अलावा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने बंदियों की ओर से तैयार उत्पादों को धनराशि लेकर बाजार या सरकारी कार्यालयों में देने के निर्देश दिए थे। केंद्रीय कारागार सितारगंज में बंदियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने और उनको रोजगार देने के लिए निजी कंपनियों से वार्ता करने को कहा गया था।

पालन रिपोर्ट में सभी सुधारों का दिया विवरण
उप महानिरीक्षक कारागार दधिराम ने आदेश के बाद सभी बिंदुओं पर आदेश के पालन की रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देहरादून जेल में बंदियों के लिए अतिरिक्त शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रकाश और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती, काउंसलिंग के लिए मनोचिकित्सक की व्यवस्था की गई है। देहरादून में कैदियों की ओर से तैयार फर्नीचर की ब्रिकी के लिए सभी जिला न्यायालयों में अनुरोध पत्र भेजे गए हैं। कारागार में तैयार बेकरी को बाहर भेजने और फूलों को गमलों सहित बाजार में बेचने के प्रयास किए जा रहे हैं। सितारगंज के बंदियों को निजी कंपनियों से रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही जेल से छूटने के बाद ऐसे बंदियों को स्थायी रोजगार देने के लिए कंपनियों से वार्ता की जा रही है। जेलों में इग्नू और एनआईओएस के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है।

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देहरादून, टिहरी और सितारगंज जेल का निरीक्षण कर कई बिंदुओं पर सुधार के आदेश दिए गए थे। साथ ही आदेश की रिपोर्ट भी मांगी गई थी। कारागार प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट भेज दी है। – प्रदीप मणि त्रिपाठी, सदस्य सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण


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