नए आयकर बिल: अब आसान नहीं टैक्स चोरी करना,अधिकारियों को मिले कई कानूनी अधिकार, कर चोरी मामले में आपके घर की तलाशी से लेकर संपत्ति तक जब्त कर सकता है आयकर विभाग

 

अगर आपने अपनी कमाई, संपत्तियों एवं अन्य मूल्यवान वस्तुओं के बारे में सही जानकारी नहीं देकर टैक्स चोरी की, तो उसकी जांच के लिए आयकर विभाग आपके घर की तलाशी ले सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि, विभाग को एक अप्रैल, 2026 से ऐसा करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। विभाग को ऐसे अधिकार देने की व्यवस्था नए आयकर बिल-2025 में की गई है।

विभाग कर चोरी की जांच के लिए जरूरत पड़ने पर संपत्तियां भी जब्त कर सकता है। मौजूदा आईटी अधिनियम-1961 की धारा-132 कर अधिकारियों को तलाशी लेने के साथ संपत्तियों और सभी तरह के खातों को जब्त करने का अधिकार देती है। हालांकि, ईमानदार करदाताओं को इसमें कोई परेशानी नहीं होगी।

 

सिरिल अमरचंद मंगलदास के टैक्स विशेषज्ञ एसआर पटनायक का कहना है कि यह तलाशी और जब्ती सिर्फ अपवाद के तौर पर होनी चाहिए, न कि नियम के रूप में। डिजिटल स्पेस में हर व्यक्ति की निजता का सम्मान जरूरी है, इसलिए इस कानून का उपयोग सिर्फ ठोस कारणों के आधार पर किया जाना चाहिए।

अज्ञात आय पर लॉकर और तिजोरी भी तोड़ सकेंगे अधिकारी
आयकर बिल के क्लॉज-247 के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के पास अज्ञात आय, संपत्ति या खातों से संबंधित कोई जानकारी लॉकर, तिजोरी या बक्से में बंद है और उसकी चाबी नहीं है तो आयकर विभाग के पास उसे तोड़ने का भी अधिकार है। वे किसी भी इमारत और स्थान पर प्रवेश कर तलाशी ले सकते हैं।

  • अगर किसी लॉक का एक्सेस कोड उपलब्ध नहीं है तो आयकर अधिकारी उसे भी तोड़ सकते हैं या अपने तरीके से खोल सकते हैं।
  • आयकर अधिकारी ऐसी जानकारियों के एक्सेस के लिए आपके कंप्यूटर सिस्टम या वर्चुअल स्पेस तक को खंगाल कर टैक्स चोरी से संबंधित जरूरी सूचनाएं हासिल कर सकते हैं।
और पढ़े  दिल्ली: मेट्रो में सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने वाले पोस्टर मिले, अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

नए बिल में वर्चुअल डिजिटल स्पेस पर स्पष्टता जरूरी
जानकारों का कहना है कि नए आयकर बिल के तहत वर्चुअल डिजिटल स्पेस यानी वीडीएस का विस्तार सांविधानिक वैधता और प्रवर्तन के संबंध में महत्वपूर्ण चिंताएं पैदा करता है। हालांकि सरकार इसे कर चोरी और अघोषित डिजिटल संपत्तियों पर अंकुश लगाने के उपाय के रूप में उचित ठहरा सकती है, लेकिन वीडीएस की अस्पष्ट परिभाषा अनिवार्य रूप से किसी व्यक्ति की वित्तीय और निजी डिजिटल तक पहुंच निगरानी की अनुमति देती है।

  • सुरक्षा उपायों के बिना यह नया बिल वित्तीय जांच और व्यक्तिगत गोपनीयता अधिकारों के बीच टकराव पैदा करता है। इससे संभावित रूप से कानूनी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं और भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास कम हो सकता है।

इन अधिकारियों को डाटा तक पहुंचने का होगा अधिकार
नए आयकर बिल के तहत आपके निजी डाटा तक पहुंचने का अधिकार जिन अधिकारियों को दिया गया है, उनमें संयुक्त निदेशक या अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त आयुक्त या अतिरिक्त आयुक्त, सहायक निदेशक या उप निदेशक, सहायक आयुक्त या उपायुक्त या आयकर अधिकारी या कर वसूली अधिकारी शामिल हैं।

  • Related Posts

    मन की बात- बिहार का मखाना पहुंच रहा ग्रीस: मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी, त्योहारी मौसम के लिए की क्या अपील?

    प्रधानमंत्री मोदी ने आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश-विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए। यह मासिक रेडियो कार्यक्रम की 139वीं कड़ी है। पीएम मोदी मे इस…

    केरल: जज का नाबालिग बेटा चला रहा था मर्सिडीज कार, दोपहिया को मारी टक्कर, बाइक सवार 54 वर्षीय शख्स की मौत

    केरल के चेरानेल्लूर में रविवार तड़के एक मर्सिडीज-बेंज कार की टक्कर से स्कूटर सवार 54 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। आरोप है कि कार अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश का नाबालिग…