जिले में व्याप्त रसोई गैस सिलिंडरों की किल्लत की आंच अब राम मंदिर तक भी पहुंच गई है। मंदिर परिसर से सटी अन्नपूर्णा रसोई में सिलिंडरों की आपूर्ति बेपटरी हो गई है। ऐसे में नित्य बनने वाले रामलला के भोग प्रसाद, श्रद्धालुओं के लिए लड्डू प्रसाद और लगभग 4,000 लोगों के भोजन पर संकट मंडरा रहा है। हालांकि, व्यवस्था से जुड़े लोग लकड़ी और कोयले का इंतजाम करके काम चला रहे हैं।
राम मंदिर परिसर से सटे हुए रामनिवास मंदिर में मां अन्नपूर्णा रसोई है। यहीं से रोज सुबह रामलला को भोग के लिए रबड़ी प्रसाद बनाया जाता है। इसके बाद प्रतिदिन दोनों पालियों में दो-दो हजार लोग भोजन ग्रहण करते हैं। इनमें राम मंदिर में तैनात विभिन्न एजेंसियों के सुरक्षाकर्मी, मंदिर के कर्मचारी, सेवादार व श्रद्धालु शामिल होते हैं।
इसके लिए प्रतिदिन 10 सिलिंडरों की यहां रोज खपत रहती है, लेकिन मुश्किल से दो-तीन सिलिंडर ही मिल पा रहे हैं। इसकी वजह से दिक्कत खड़ी हो रही है। व्यवस्था से जुड़े विनोद श्रीवास्तव ने बताया कि सिलिंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से रसोई में चूल्हे बनाए गए हैं, जहां प्रतिदिन दो से ढाई क्विंटल लकड़ी की खपत हो रही है। यह लकड़ी भी मुश्किल से मिल रही है। कई बार तो गीली लकड़ी की ही आपूर्ति होती है, जिससे उठने वाले धुएं से दिक्कत भी होती है। वहीं, भोजन पकाने में अधिक समय लगता है, लेकिन व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए हर हाल में इसे संचालित किया जा रहा है।
60 सिलिंडरों का है कनेक्शन
विनोद ने बताया कि रसोई में 30 घरेलू और 30 कॉमर्शियल सिलिंडर के लिए अलग-अलग एजेंसियों से कनेक्शन लिए गए हैं। कॉमर्शियल सिलिंडर के डीबीएल कनेक्शन है। बताया कि कुछ एजेंसियों से अधिक दिक्कत रही है। दो-तीन सिलिंडर में गैस की मात्रा भी कम मिली है, जिसे वापस कराया गया है। एक एजेंसी से 15 सिलिंडर के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन कनेक्शन नहीं मिल सका है।
श्रद्धालुओं के लिए बनता है प्रसाद लड्डू
इसी रसोई से 200 से 250 पैकेट लड्डू भी बनाए जाते हैं, जो राम मंदिर में श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराए जाते हैं। विभिन्न आयोजनों पर एक से डेढ़ लाख पीस लड्डू व छप्पन भोग तक यहीं से बनाया जाता हैं। व्यवस्थापक ने बताया कि यह अति महत्वपूर्ण सेवा है, जिसे किसी कीमत पर बाधित नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन सिलिंडरों की आपूर्ति सुचारू रूप से होती रहती तो अधिक सहूलियत रहती।









