तमिलनाडु- विजय और कांग्रेस के बीच बन गई बात! गठबंधन सरकार का रास्ता साफ, DMK को छोड़ TVK को देगी समर्थन

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मिलनाडु में सत्ता के समीकरण बदल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी ने विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का सर्वसम्मति से फैसला किया है। विधानसभा चुनावों में टीवीके बहुमत से मात्र 10 सीटें कम रह गई थी।

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक देर रात वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में टीवीके को समर्थन देने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने विधानसभा चुनावों में 108 सीटें जीती हैं।

कांग्रेस देगी विजय को समर्थन
सूत्रों के अनुसार, गूगल मीट सत्र के दौरान तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक स्थिति और टीवीके के साथ गठबंधन के रणनीतिक निहितार्थों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। वहीं, दिल्ली में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस बात की पुष्टि की है कि विजय ने तमिलनाडु में कांग्रेस से समर्थन मांगा था। उन्होंने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी को अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

टीवीके का ऐतिहासिक प्रदर्शन
इससे पहले चार मई को तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके को 108 सीटें मिलीं, जो बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों से 10 कम हैं। पार्टी अब डीएमके और एडीएमके दोनों खेमों की छोटी पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।

अन्य दलों का संभावित समर्थन
तमिलनाडु कांग्रेस के पास पांच सीटें हैं, जबकि पीएमके के पास चार सीटें हैं। इसके अलावा, सीपीआई, सीपीआई (एम) और वीसीके के पास दो-दो सीटें हैं। यह उम्मीद जताई जा रही है कि ये पार्टियां भी विजय के नेतृत्व वाली टीवीके को समर्थन दे सकती हैं।

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राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर
कांग्रेस द्वारा टीवीके को समर्थन देना न केवल तमिलनाडु के लिए, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। वर्तमान में कांग्रेस केंद्र में इंडिया गठबंधन के तहत एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के साथ सहयोगी है। ऐसे में विपक्षी दलों को 2029 के आम चुनावों से पहले पार्टियों के बीच की अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा।


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