Super Dadi- 93 की उम्र में घाघरा-चोली पहन ट्रैक पर दौड़ीं दादी, जीते लिए 3 गोल्ड मेडल

 

 

उम्र सिर्फ एक संख्या है, इस कहावत को हकीकत में बदलकर दिखाया है राजस्थान की 93 वर्षीय सुपर दादी पानी देवी ने। बीकानेर की इस अदम्य साहस वाली महिला ने 45वीं राष्ट्रीय मास्टर्स एथलेटिक प्रतियोगिता में बैंगलोर के ट्रैक पर तीन-तीन गोल्ड मेडल जीतकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। घाघरा-चोली पहनकर 100 मीटर की दौड़ में 45 सेकंड का रिकॉर्ड बनाना, डिस्कस थ्रो और शॉट पुट में स्वर्ण हासिल करना, ये सब दिखाता है कि हौसले और सपनों के सामने उम्र की कोई दीवार नहीं होती।

चोट के बावजूद 45 सेकंड में जीती रेस

ट्रैक पर पानी देवी का साहस देखने लायक था। घुटने और एंकल में चोट होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। परंपरागत घाघरा-चोली पहनकर जब वे ट्रैक पर उतरीं, तो सभी की निगाहें उन पर टिक गईं। 100 मीटर की दौड़ उन्होंने महज 45 सेकंड में पूरी की और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके इस जज़्बे ने दर्शकों को खड़ा होकर तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।

 

कठिन परिस्थितियों में बीता जीवन

पानी देवी का जीवन हमेशा आसान नहीं रहा। वे उस दौर में पली-बढ़ीं जब लड़कियों को पढ़ाई और खेलों की आज़ादी नहीं थी। 15 साल की उम्र में शादी हो गई और 50 की उम्र में वे अकेले ही 5 बेटों और 3 बेटियों का पालन-पोषण करने लगीं। परिवार का खर्च चलाने के लिए खेतों में मजदूरी की और दूर-दराज तक सूत बेचकर अपना जीवन चलाया।

91 साल की उम्र में लिया एथलेटिक्स का फैसला

कभी न हार मानने वाली पानी देवी ने जिंदगी का नया सफर 91 साल की उम्र में शुरू किया। अपने पोते को पैरा-एथलीट्स को ट्रेन करते देखकर उन्होंने कहा, “मैं भी यह कर सकती हूं।” और वहीं से उनकी एथलेटिक्स यात्रा की शुरुआत हुई। जिस उम्र में लोग बिस्तर पकड़ लेते हैं, उस उम्र में उन्होंने खेल के मैदान में कदम रखा।

तीन गोल्ड मेडल की अद्भुत उपलब्धि

और पढ़े  करवा चौथ 2026: खत्म हुआ इंतजार! करवा चौथ पर कहीं दिखा चांद, जानिए आपके शहर में कब निकलेगा चांद ?

बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पानी देवी ने 100 मीटर रेस, डिस्कस थ्रो और शॉट पुट तीनों में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। उनकी उपलब्धि इस बात का सबूत है कि सही जज़्बा हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

प्रेरणा की मिसाल बनीं ‘सुपर दादी’

पानी देवी की यह यात्रा हम सभी को यह संदेश देती है कि नई शुरुआत करने की कोई उम्र नहीं होती। चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, हिम्मत और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने अपने साहस से यह साबित किया कि सपने देखने की उम्र तय नहीं होती, उन्हें पूरा करने की हिम्मत ही मायने रखती है।

  • Related Posts

    नाबालिग से हैवानियत: गोवा में थाने के अंदर यौन उत्पीड़न का आरोप, केस दर्ज, इंस्पेक्टर और महिला सहयोगी नामजद

    गोवा के उत्तरी हिस्से में क्राइम ब्रांच कार्यालय में 16 वर्षीय किशोरी के साथ कई बार यौन उत्पीड़न किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक पुलिस…

    बंगलूरू: फाइव स्टार होटल में बड़ा हादसा, स्विमिंग पूल में करंट लगने से दो विदेशी नागरिकों की मौत, जांच जारी

    बेंगलुरु के एक फाइव स्टार होटल में शुक्रवार शाम बड़ा हादसा हो गया। होटल के स्विमिंग पूल में नहाने के दौरान करंट लगने से दो विदेशी नागरिकों की मौत हो…