झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे और उन्होंने कई बैरिकेड तोड़ दिए। जगन्नाथपुर मंदिर के पास अंतिम बैरिकेड पर पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान स्थिति बिगड़ गई और पुलिस ने पानी की बौछार के बाद लाठीचार्ज किया। कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई में घायल होने का दावा किया है।
जगन्नाथपुर मंदिर के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। प्रदर्शनकारी पीयूष कुमार सोनी ने पुलिस कार्रवाई को बर्बर बताते हुए दावा किया कि कई महिला छात्रों को भी चोटें आई हैं। वहीं हजारीबाग से मार्च में शामिल हुए विक्रम कुमार ने सिर में चोट लगने का दावा किया।
भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर नौ दिनों से अनशन कर रहे JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो भी एंबुलेंस से विधानसभा मार्च में शामिल हुए। उनके हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर भी दिखाई दी। महतो ने विधानसभा मार्च के रास्ते में तारबंदी वाली बैरिकेडिंग लगाए जाने पर सवाल उठाया और कहा कि छात्रों के साथ कथित अन्याय को लेकर उनमें आक्रोश बढ़ रहा है।
क्या बोले रांची एसपी?
रांची सिटी एसपी पारस राणा ने कहा कि 90% छात्र शांतिपूर्ण हैं, लेकिन कुछ छात्रों ने बैरिकेडिंग तोड़ी और पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने पुलिस के संयम बरतने का दावा करते हुए छात्रों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और पत्थरबाजी नहीं करने की अपील की।
1500 से ज्यादा जवान संभाल रहे हैं मोर्चा
विधानसभा मार्च को देखते हुए करीब चार किलोमीटर लंबे रास्ते पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। निषेधाज्ञा लागू करने के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, रैपिड एक्शन फोर्स, इंडियन रिजर्व बटालियन, जिला पुलिस और क्विक रिस्पांस टीम के 1,500 से अधिक जवान तैनात किए गए थे।
98 फीसदी मांगें मानने के सरकार के दावे पर विवाद
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन गतिरोध खत्म नहीं हुआ। आखिरी दौर की बातचीत के बाद सरकार ने दावा किया था कि उसने प्रदर्शनकारियों की 98 फीसदी मांगें मान ली हैं।







