शिबू सोरेन-  ‘शिबू सोरेन भारत रत्न थे, हैं और रहेंगे’, पिता को पद्म भूषण मिलने पर भावुक हुए CM सोरेन

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने दिवंगत पिता और आदिवासी आंदोलन के महानायक शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने पर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिबू सोरेन झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के आदिवासी समाज के लिए भारत रत्न थे, हैं और हमेशा रहेंगे।

यूके दौरे पर मौजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि लद्दाख से लेकर केरल और राजस्थान से असम तक, देशभर के आदिवासी समाज के दिलों में ‘बाबा दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन भारत रत्न से कम नहीं हैं। उन्होंने शिबू सोरेन को मां भारती का सच्चा सपूत बताया।

 

समानता और सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रतीक
हेमंत सोरेन ने कहा कि शिबू सोरेन का पूरा जीवन समानता, सामाजिक न्याय, आदिवासी अस्मिता, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और शोषित-वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित रहा। इसी संघर्ष के परिणामस्वरूप दशकों बाद झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिला, जिसने यहां के लोगों को अपनी पहचान पर गर्व करने का अवसर दिया।

 

भारत रत्न की मांग पर अडिग JMM
राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी बयान जारी कर कहा कि शिबू सोरेन को पद्म भूषण नहीं, बल्कि भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए था। पार्टी ने साफ किया कि भारत रत्न की मांग आगे भी जारी रहेगी। JMM प्रवक्ता मनोज पांडेय और सांसद महुआ माजी ने भी कहा कि केंद्र द्वारा पद्म भूषण दिया जाना सम्मान की बात है, लेकिन शिबू सोरेन का कद भारत रत्न से कम नहीं है। वहीं कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने उन्हें गरीबों और आदिवासियों की मजबूत आवाज बताया।

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एक युग का अंत, लेकिन विरासत अमर

 

  • 81 वर्षीय शिबू सोरेन के निधन के साथ झारखंड की राजनीति के एक युग का अंत हो गया।
  • हालांकि, उनका संघर्ष, नेतृत्व और आदिवासी समाज के लिए योगदान आज भी जीवित है।
  • भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी पद्म भूषण को झारखंड के लिए गौरव का क्षण बताया।
  • 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों से भरा रहा।
  • कम उम्र में पिता की हत्या ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और वे आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में कूद पड़े।
  • 1973 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की सह-स्थापना की, जो आगे चलकर झारखंड राज्य आंदोलन की सबसे बड़ी आवाज बनी।
  • 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन उनके जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जाता है।
  • आठ बार लोकसभा सांसद और एक बार राज्यसभा सदस्य रहे शिबू सोरेन केंद्र सरकार में कोयला मंत्री भी रहे।

विवादों के बावजूद जननेता
हालांकि उनके राजनीतिक जीवन में कई कानूनी विवाद भी आए, लेकिन अंततः वे सभी मामलों में बरी हुए। तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली चेहरा बने रहे।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हेमंत सोरेन का सम्मान समारोह
रविवार को यूनाइटेड किंगडम (यूके) दौरे के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सोमरविले कॉलेज में आयोजित एक सम्मान समारोह में शामिल हुए। यह कार्यक्रम उनके शैक्षणिक और नीति से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संवाद का हिस्सा था।  मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, सोमरविले कॉलेज की प्रिंसिपल कैथरीन रॉयल ने हेमंत सोरेन के सम्मान में इस कार्यक्रम की मेजबानी की। समारोह में आदिवासी कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और उच्च शिक्षा तक समान पहुंच जैसे क्षेत्रों में मुख्यमंत्री के कार्यों की सराहना की गई।

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कॉलेज परिसर में अनौपचारिक बातचीत के दौरान छात्रों और शिक्षकों ने झारखंड सरकार के साथ आगे भी संवाद बढ़ाने में रुचि दिखाई। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक नीतियों पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित करने की इच्छा जताई और उन्हें छात्रों को संबोधित करने का आमंत्रण भी दिया।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने सेंट जॉन्स कॉलेज के अभिलेखागार का भी दौरा किया, जहां आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें और दस्तावेज संरक्षित हैं। इन सामग्रियों को देखकर हेमंत सोरेन ने झारखंड के निर्माण में जयपाल सिंह मुंडा की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया। मुख्यमंत्री ने सेंट जॉन्स कॉलेज के साथ दस्तावेजों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और अकादमिक सहयोग को लेकर संयुक्त पहल की संभावना भी जताई।

इसके साथ ही जयपाल सिंह मुंडा और शिबू सोरेन की विरासत के सम्मान में विशेष डॉक्टोरल स्कॉलरशिप शुरू करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। हेमंत सोरेन ने ऑल सोल्स कॉलेज का भी दौरा किया और ऑक्सफोर्ड से जुड़े रहे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की।


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