ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर छाया संकट: पहली बार आईएईए ने माना नियमों का पालन नहीं हुआ, क्या लगेगा प्रतिबंध?

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय दबाव अब और बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सामने ऐसा प्रस्ताव रखने की तैयारी की है, जिसमें ईरान को परमाणु अप्रसार की अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन न करने के मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक भेजने की बात है। यह मामला इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि जून 2025 में आईएईए बोर्ड ने करीब 20 साल बाद पहली बार ईरान को अपनी परमाणु अप्रसार संबंधी जिम्मेदारियों का पालन न करने वाला पाया था।

मसौदे में ईरान के खिलाफ क्या कहा गया?

प्रस्ताव अभी बातचीत के दौर में है और आईएईए बोर्ड को औपचारिक रूप से नहीं सौंपा गया है। इसमें आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से प्रस्ताव और पहले पारित प्रस्तावों को आईएईए के सभी सदस्यों के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा तक पहुंचाने को कहा गया है। प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से पैदा चुनौतियों का कूटनीतिक समाधान निकालने का समर्थन भी किया गया है। सभी पक्षों से बातचीत में रचनात्मक तरीके से शामिल होने की अपील की गई है। प्रस्ताव में बदलाव भी संभव है। औपचारिक रूप से पेश होने के बाद इस पर अगले सप्ताह वियना में आईएईए बोर्ड की बैठक में मतदान होगा।

ईरान की सबसे बड़ी परेशानी क्या?

परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान पर अपने सभी परमाणु पदार्थ और गतिविधियों की जानकारी देने तथा आईएईए के निरीक्षकों को यह जांचने देने की कानूनी जिम्मेदारी है कि परमाणु सामग्री का इस्तेमाल शांतिपूर्ण कामों के अलावा कहीं नहीं हो रहा। जून 2025 में अमेरिका और इस्राइल के ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद से ईरान ने प्रभावित परमाणु स्थलों पर आईएईए निरीक्षकों को प्रवेश नहीं दिया है। एजेंसी छह महीने से अधिक समय से हथियार बनाने की क्षमता के करीब पहुंच चुके यूरेनियम के भंडार की स्थिति भी सत्यापित नहीं कर पाई है। आईएईए ने हाल में चेतावनी दी कि निरीक्षकों को प्रवेश न देना और परमाणु सामग्री की पुष्टि न हो पाना प्रसार का जोखिम पैदा करता है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

ईरान के पास कितना यूरेनियम और खतरा कितना बड़ा?

    • आईएईए के अनुसार ईरान के पास 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है, जिसे 60 फीसदी तक शुद्धता पर समृद्ध किया गया है।
    • हथियार बनाने के लिए आम तौर पर करीब 90 फीसदी शुद्धता वाला यूरेनियम चाहिए होता है। यानी ईरान का मौजूदा भंडार तकनीकी रूप से उस स्तर से बहुत दूर नहीं है।
  • आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने पिछले साल कहा था कि यह मात्रा ईरान को सैद्धांतिक रूप से 10 परमाणु बम बनाने में सक्षम कर सकती है, अगर वह अपने कार्यक्रम को हथियार बनाने की दिशा में ले जाने का फैसला करे।
  • उन्होंने साफ किया था कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के पास परमाणु हथियार मौजूद है।
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यूरेनियम के पुराने निशानों की जांच क्यों अहम?

आईएईए की वर्षों से चल रही जांच में ईरान के कुछ ऐसे स्थानों पर यूरेनियम के निशान मिले हैं, जिनके बारे में पहले जानकारी नहीं दी गई थी। एजेंसी की हालिया गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार इन निशानों की जांच में भी कोई प्रगति नहीं हुई है। पश्चिमी देशों के अधिकारियों को शक है कि ये निशान इस बात के संकेत हो सकते हैं कि ईरान ने 2003 तक गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम चलाया था। ईरान इन आरोपों को खारिज करता है और लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है।

सुरक्षा परिषद में मामला गया तो क्या होगा?

ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक भेजने का मतलब मामले को आईएईए से आगे संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली संस्था के सामने ले जाना होगा। सुरक्षा परिषद के पास आगे कानूनी रूप से बाध्यकारी कदम उठाने की क्षमता है, जिनमें प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस मामले में कड़ी संयुक्त राष्ट्र कार्रवाई की संभावना सीमित मानी जा रही है, क्योंकि ईरान के सहयोगी रूस और चीन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो का अधिकार है।

क्या कूटनीति का रास्ता अभी खुला?

पश्चिमी देशों की ओर से प्रस्ताव लाने की तैयारी के बावजूद कूटनीति का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। मसौदे में भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं का राजनयिक समाधान निकालने की बात कही गई है। ईरान और आईएईए के बीच सहयोग और बातचीत की कमी ने स्थिति को ज्यादा गंभीर बनाया है। अब अगले सप्ताह आईएईए बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पर होने वाला फैसला यह तय करने में अहम होगा कि मामला सुरक्षा परिषद तक पहुंचता है या फिर बातचीत के लिए एक और मौका बचता है।

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