शास्त्री के निवेदन को सिंधिया ने बताया आदेश, बोले- पालन होगा,जानें क्या है बागेश्वर महाराज की मांग?

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शिवपुरी जिला मुख्यालय पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भागवत कथा का वाचन जारी है। इसी दौरान इस भागवत कथा में दर्शन के लिए केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पहुंचे। श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से दक्षिणा में 108 फीट की विशाल शिव मूर्ति की मांग की। उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा में हम कथा सेवा करेंगे।

दरअसल, दोपहर में दिव्य दरबार शुरू करने से पहले पंडित धीरेंद्र ने शिवपुरी में भगवान शिव की 108 फीट की बड़ी मूर्ति स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। फिर शाम को कथा में केंद्रीय मंत्री सिंधिया पहुंचे तो उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर कर दी। उन्होंने कथा मंच से एलान किया कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री के निवेदन नहीं, आदेश का सत-प्रतिशत पालन होगा।

 

मूर्ति को पर्वत के ऊपर स्थापित करने का दिया सुझाव
दिव्य दरबार के दौरान पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि शिवपुरी का मतलब ‘शिव की नगरी’ है। इसलिए यहां बहुत बड़ी शिव जी की मूर्ति होनी चाहिए। सुझाव दिया कि यह मूर्ति 108 फीट की होनी चाहिए, जिसे किसी पर्वत के ऊपर स्थापित किया जाए। उस पर्वत का नाम कैलाश रखा जाए और वहां पर पूरा आध्यात्मिक केंद्र विकसित कर द्वादश ज्योतिर्लिंग भी स्थापित किए जाए। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और यह एक दर्शनीय स्थल बनेगा। शिवपुरी का नाम भी सार्थक हो जाएगा ‘यथा नाम तथा गुण भी तो हो जाएगा’। फिर शिवपुरी को शिव जी की विशाल मूर्ति से भी जाना जाएगा। पूरे सावन महीने में अगल-बगल के जिलों से उस मंदिर में कांवड़ यात्रा आएगी, जिससे शिवपुरी महादेव की नगरी हो जाएगी और हर हर महादेव के नारे से गुंजायमान हो जाएगी।

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शिवपुरी अच्छी लगने लगी है
उन्होंने कहा कि अब उन्हें शिवपुरी अच्छी लगने लगी है और उन्हें तब तक शिवपुरी आना चाहिए, जब तक कि शिवपुरी भगवामय (भगवा रंग में रंगी हुई) या राममय न हो जाए। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा के आखिरी दिन, 30 दिसंबर को फिर से दिव्य दरबार की घोषणा की है।

दिव्य दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी
दिव्य दरबार के चलते गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।  शिवपुरी के अलावा दूसरे पड़ोसी जिलों से भी लोग भारी संख्या में पहुंचे। कथा स्थल आस्था का संगम नजर आया। कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।


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