एलयूसीसी घोटाले में अब ईडी ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। उत्तराखंड और अन्य राज्यों में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर जांच करते हुए ईडी ने एलयूसीसी और सागा ग्रुप संचालक समीर गुप्ता व उसके साथियों की 30 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अटैच किया गया है। इनमें 1.35 करोड़ रुपये नकद, लग्जरी कारें, सोना और अचल संपत्तियां शामिल हैं।
जांच में सामने आया है कि समीर अग्रवाल के सागा ग्रुप ने एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी) और अन्य सहकारी समितियों के जरिए साल 2009 से जनता को ठगना शुरू किया था। आरोपियों ने आरडी, एफडी और मासिक आय योजनाओं में निवेश पर तीन से पांच साल के भीतर रकम दोगुनी-तिगुनी करने और कार जैसे महंगे गिफ्ट देने का झूठा लालच दिया। बिना किसी वास्तविक व्यापार के महज फर्जी बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर जनता से 10 हजार करोड़ रुपये से से अधिक की रकम ठग ली गई। शुरुआत में निवेशकों को भरोसा जीतने के लिए कुछ भुगतान किए गए, लेकिन बाद में समीर अग्रवाल और उसके साथियों ने अधिकांश रकम अपने निजी इस्तेमाल और एजेंटों को कमीशन बांटने में उड़ा दी।
उत्तराखंड में दर्ज मामलों के आधार पर सीबीआई ने भी मामले की जांच शुरू की है। बड्स एक्ट के तहत कई संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है। उत्तराखंड के लोगों से एलयूसीसी ने 800 करोड़ रुपये ठगे थे। इनमें से 400 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं। अब ईडी की जांच में और अधिक बड़ी बात सामने आई है। ईडी की जांच में 50 से अधिक शेल कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पाया गया कि जनता से ज्यादातर पैसा नकद में इकट्ठा किया गया। इसके बाद रीजनल कैश चेस्ट के जरिए इसे शेल कंपनियों और हवाला चैनलों के माध्यम से देश और विदेश में अचल और चल संपत्तियां खरीदने में लगा दिया गया।








