द जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को लेकर सोमवार को पंजाब सरकार को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष जवाब देना पड़ा। पेशी के दौरान कुछ विधायकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने एक्ट को पढ़े बिना ही उस पर सहमति दे दी थी।
इस पर विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि कमेटी ने सुझाव मांगने के लिए एसजीपीसी को औपचारिक निमंत्रण भेजा था लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
विचार किए बिना ही हुआ पारित : बाजवा
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि जिस दिन विधानसभा में यह विधेयक पारित हुआ था उसी दिन उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया था कि पहले सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट सदन में रखी जाए। कमेटी कई महीनों से इस विषय पर काम कर रही थी लेकिन उसकी रिपोर्ट पर विचार किए बिना विधेयक पारित कर दिया गया।
बैठक के दौरान आप विधायक जगरूप सिंह ने कहा कि उन्होंने एक्ट लागू करने के पक्ष में सहमति तो दी थी लेकिन उसे पढ़ा नहीं था। विधायक कुलवंत सिंह ने भी यही बात दोहराई। इस स्वीकारोक्ति के बाद पूरे घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई।
कार्यवाही का हुआ लाइव प्रसारण
इस बीच जत्थेदार ने कहा कि पंथक कचहरी की कार्यवाही का पहली बार लाइव प्रसारण किया गया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्वयं कार्यवाही का लाइव प्रसारण करने की चुनौती दी थी इसलिए संगत के सामने पूरी कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया गया। उन्होंने सभी मंत्रियों और विधायकों से कहा कि अकाल तख्त से बाहर जाने के बाद वे एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी से बचें और धार्मिक मामलों में संयम बरतें।
एक्ट पर अकाल तख्त की प्रमुख आपत्तियां
- बीड़ शब्द हटाकर स्वरूप शब्द लिखा जाए।
- कस्टोडियन शब्द हटाया जाए। यह तय करने का अधिकार सरकार या विधानसभा का नहीं बल्कि पंथ और श्री अकाल तख्त साहिब का है।
- गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को यूनिक नंबर देने के प्रावधान पर आपत्ति। सरकार केवल सुझाव दे सकती है, आदेश नहीं।
- गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप की देखरेख और मर्यादा तय करने का अधिकार सरकार का नहीं बल्कि पंथ का है।
- बेअदबी करने वालों को कड़ी सजा देने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन दुर्घटना में क्षतिग्रस्त स्वरूप को केस प्रॉपर्टी न बनाने का स्पष्ट प्रावधान जोड़ा जाए।
- यदि किसी दुर्घटना में स्वरूप को नुकसान होता है तो उसे केस प्रॉपर्टी नहीं माना जाए और कानून में इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
- अकाल तख्त के प्रस्तावित संशोधन मिलते ही एक माह में फैसला करेगी सरकार : चीमा
जत्थेदार के साथ हुई चर्चा पर सरकार गंभीरता से करेगी विचार
श्री अकाल तख्त साहिब पर सोमवार को पेशी के बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवा और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सरकार का पक्ष रखा। चीमा ने कहा कि जत्थेदार साहिब ने एक्ट में संशोधन के लिए एक माह का समय दिया है।
प्रस्तावित संशोधन विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से सरकार को भेजे जाएंगे। उन्हें प्राप्त होने के बाद सरकार सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श कर एक महीने के भीतर फैसला लेगी। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा सर्वोपरि है इसलिए बैठक के भीतर हुई चर्चा को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। सरकार जत्थेदार की ओर से रखे गए सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी।








