अकूत काली कमाई का किंग था रिटायर्ड एआरटीओ ललित कुमार , आमदनी से 73.6% अधिक खर्च, जानिए कहां से आए 20 करोड़ के गहने

त्तरप्रदेश विजिलेंस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में रिटायर्ड सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर 26 घंटे तक छापेमारी कर भारी मात्रा में नकदी, सोना-चांदी और निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद किए। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को 13 किलोग्राम सोना, 9 किलोग्राम चांदी, हीरे के आभूषण और 1.62 करोड़ रुपये नकद मिले। आभूषणों की कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

 

तलाशी के दौरान घर में कई लॉकर मिले, जिनमें सोने-चांदी के बिस्किट, जेवरात और भारी मात्रा में नकदी रखी गई थी। जांच में विभिन्न अचल संपत्तियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए, जिनकी अनुमानित कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा टोयोटा इनोवा और हुंडई आई-20 कार, रिवॉल्वर, बैंक खातों, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में एक करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के प्रमाण भी मिले हैं।

 

जांच एजेंसी के अनुसार, ललित कुमार की कुल वैध आय 93.26 लाख रुपये थी, जबकि चल-अचल संपत्तियों और अन्य मदों पर उनका खर्च 1.61 करोड़ रुपये पाया गया। यानी उन्होंने अपनी आय से 68.66 लाख रुपये, लगभग 73.6 प्रतिशत अधिक खर्च किए। इस अतिरिक्त संपत्ति और खर्च का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई है।

संपत्तियां देख दंग रह गए अधिकारी

छापे के दौरान ललित कुमार के घर पर कई लॉकर पाए गए, जिसमें भारी मात्रा में नगदी, सोने-चांदी के बिस्किट और जेवरात आदि बरामद हुए। गहनता तलाशी में आवास में विभिन्न जगहों पर पैकेट बनाकर छिपाकर रखी गई 1.62 करोड़ रुपये की नगदी भी मिली। अधिकारियों ने बरामद किए गए करीब 22 किलो सोने-चांदी के बिस्किट एवं आभूषणों का सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वैल्यूअर से मूल्यांकन कराया, जिसमें उनका मूल्य करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया।

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इसके अलावा तमाम संपत्तियों में निवेश के दस्तावेज भी बरामद हुए, जिनकी कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। इसके अलावा टोयोटा इनोवा, हुंडई आई-20 कार, रिवाल्वर, विभिन्न बैंकों, पोस्ट आफिस, म्यूचुअल फंड, फिक्स डिपोजिट आदि में लगभग 1 करोड़ से भी अधिक के निवेश के सुबूत भी मिले। वहीं आवास की साज-सज्जा व घरेलू उपकरण आदि में भी करोड़ों रुपये खर्च होना पाया गया।

 

 

डेढ़ साल तक एआरटीओ रायबरेली में आरआई के पद पर किया कार्य 

आगरा के तत्कालीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ललित कुमार का रायबरेली के नूर मार्केट मिलन सिनेमा गली में मकान है। ललित कुमार ने शहर के जीआईसी में पढ़ाई की थी। साथ ही रायबरेली के जिस मकान में वह परिवार के साथ रहते थे। उनको पाटीदार के रूप में मिला था।

वर्ष 2010-11 में ललित कुमार रायबरेली एआरटीओ कार्यालय में आरआई के पद पर भी कार्यरत रहे थे। करीब डेढ़ साल तक वह आरआई के पद पर रायबरेली में काम करते रहे। इसके बाद स्थानांतरण हुआ था। आरआई बनने से पहले वह रोडवेज में फोरमैन थे।

मोहल्ले के लोगों ने बताया कि तीन माह पहले ललित कुमार रायबरेली आए थे। इस दौरान उन्होंने अपने किरायेदार से कब्जा लिया था। इनके मकान में तीन दुकानें हैं, जो किराये पर उठी थीं। एक किरायेदार संतोष चौधरी से दुकान पर कब्जे को लेकर विवाद हो गया था। जिसका मामला कोर्ट गया था। कोर्ट का फैसला आने के बाद ललित कुमार तीन माह पहले दुकान का कब्जा लेने आए थे।

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