रामजन्मभूमि परिसर में चढ़ावे से जुड़े प्रकरण के सामने आने के बाद करीब 25 दिनों तक लगातार दुष्प्रचार किए जाने का दावा सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपनी डायरी में लिखा है कि शुरुआती दौर में मामला मंदिर से जुड़े घटनाक्रम तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे विभिन्न माध्यमों से चल रहा दुष्प्रचार उनके व्यक्तिगत जीवन तक केंद्रित हो गया। इससे वह मानसिक रूप से आहत हुए और उन्होंने सार्वजनिक रूप से मौन धारण कर लिया।
चंपत राय की डायरी के मुताबिक 11 जून की रात लखनऊ में पांच ट्रस्टियों की बैठक में प्रकरण की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त तीन न्यायाधीशों की समिति गठित करने पर विचार हुआ था। इसी क्रम में तैयार किए गए एक प्रारूप को वाट्सएप पर न्यासियों को भेजते समय वह अनजाने में मोबाइल के स्टेटस पर भी लग गया।
कुछ मिनट में उसे हटा दिया गया, लेकिन तब तक कई लोगों की नजर उस पर पड़ चुकी थी। इसके बाद प्रारूप के प्रेस तक पहुंचने और अगले दिन अखबार में प्रकाशित होने से विवाद और तेज हो गया। इसके बाद 12 जून को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विशेष जांच दल से जांच कराने का अनुरोध किया गया।
अगले दिन पत्र मुख्यमंत्री तक पहुंचा और एसआईटी गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसी दौरान लगातार आरोप-प्रत्यारोप और मिथ्या प्रचार शुरू हो गया। धीरे-धीरे इसका केंद्र मंदिर प्रकरण से हटकर व्यक्तिगत जीवन बन गया।
रामजन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की आंतरिक पड़ताल में सामने आए तथ्य इस पूरे प्रकरण को महज चार जून की घटना तक सीमित नहीं रखते। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की गोपनीय डायरी में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी की आशंका इससे कुछ महीने पहले भी सामने आ चुकी थी। अप्रैल में ही एक कर्मी को चोरी के आरोप में हटा दिया गया था। चार जून को चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने पर पुराने प्रकरण की भी कड़ियां खंगाली गईं।
डायरी के अनुसार, पांच जून की रात से आठ जून की शाम तक लगातार पूछताछ और धन की बरामदगी का सिलसिला चला। यानी पुलिस कार्रवाई शुरू होने से पहले ही ट्रस्ट स्तर पर पूछताछ कर धन की बरामदगी की कोशिश की गई और उसमें सफलता भी मिली। ट्रस्ट की ओर से अलग-अलग लोगों से पूछताछ की गई और इस दौरान देवोत्तर राशि का काफी धन वापस प्राप्त किया गया। आठ जून को डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, परिसर पुलिस के तीन लोगों और चंपत राय ने भी पूछताछ की।
चंपत राय की डायरी में दर्ज घटनाक्रम अब कई सवाल खड़े करता है। अप्रैल में चोरी के आरोप में कर्मी को हटाया गया था तो उससे पहले क्या हुआ था?। दो गणना कर्मियों के बयानों में विरोधाभास क्यों था? पुराने कर्मचारी से जुड़ा प्रकरण और उसके संबंध में सामने आए विरोधाभासी बयान यह सवाल छोड़ जाते हैं कि क्या चार जून को सामने आई चढ़ावा चोरी किसी एक दिन की वारदात थी या इसके पीछे लंबे समय से चल रही कोई व्यवस्था थी।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के मामले में मंदिर परिसर के भीतर हुई कार्रवाई को लेकर पूर्व महासचिव चंपत राय की गोपनीय डायरी में कई गंभीर सवाल दर्ज हैं। डायरी में उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव तक घटना की जानकारी पहुंचने के बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि “हमारे बीच में छिद्र कहां है, कौन भेदिया है?”








