मध्यप्रदेश में राज्यसभा की रिक्त सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नामांकन वैध पाया गया है। मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनके नामांकन पर तीन लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। आपत्तियों में पुरी की ओर से जमा किए गए शपथ पत्र (फॉर्म-26) को अधूरा और अमान्य बताया गया था। हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने सभी आपत्तियों पर सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें खारिज कर दिया। रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से जारी आदेश के अनुसार, हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था। मंगलवार दोपहर दो बजे नामांकन पत्रों की जांच की गई। इस दौरान कांते सयन्ना, हेमंत कटारे और राजकुमार लोहानी ने नामांकन के खिलाफ लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।
विधायक हेमंत कटारे के मुताबिक, चुनाव में प्रत्याशी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत शपथ लेकर अपना हलफनामा देना होता है। उन्होंने The Conduct of Elections Rules, 1961 का हवाला देते हुए कहा कि हरदीप पुरी के दस्तावेज पर ‘अटेस्टेड’ लिखा है, जबकि इसे विधिवत शपथपूर्वक प्रमाणित किया जाना चाहिए। कटारे ने शपथपत्र में पत्नी का नाम नहीं होने और अमेरिकी डॉलर और स्विस फ्रैंक विदेशी मुद्रा में संपत्ति का हिसाब देने को भी नियमों के अनुरूप नहीं बताया। उनका दावा है कि इन कमियों के आधार पर नामांकन रद्द किया जाना चाहिए था।
कांग्रेस ने नामांकन की जांच करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। कटारे ने कहा कि नामांकन से जुड़े मामलों में सभी प्रत्याशियों के साथ एक समान व्यवहार होना चाहिए। यदि नियमों को दरकिनार कर किसी प्रत्याशी को राहत दी जाती है, तो कांग्रेस इस फैसले को चुनाव आयोग के साथ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
राजकुमार लोहानी का नामांकन रद्द होने पर भी विवाद
कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार लोहानी का नामांकन फॉर्म-26 निर्धारित तरीके से जमा नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया था। लोहानी का कहना है कि उन्होंने दस्तावेज ई-मेल के जरिए भेजा था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने इसे मान्य नहीं माना। अधिकारियों की दलील थी कि दस्तावेज तय समय के भीतर व्यक्तिगत रूप से जमा करना जरूरी था।
लोहानी ने आरोप लगाया कि उनके वकील ने जरूरी कागजात जमा करने के लिए कुछ और समय मांगा था, लेकिन अनुमति नहीं मिली। दूसरी ओर, हरदीप पुरी के नामांकन पर आपत्ति दर्ज होने के बाद भाजपा प्रत्याशी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। इसी अंतर को आधार बनाकर लोहानी ने निर्वाचन प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाया है। कांग्रेस का मुख्य सवाल यही है कि यदि एक निर्दलीय प्रत्याशी का नामांकन दस्तावेजी कमी के चलते खारिज किया जा सकता है, तो भाजपा प्रत्याशी के हलफनामे में बताई जा रही त्रुटियों पर अलग प्रक्रिया क्यों अपनाई जा रही है।
कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और आतिफ अकील ने कहा कि पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के खिलाफ वे कल माननीय न्यायालय की शरण में जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र पर प्रहार है। इतनी बड़ी त्रुटियों के बावजूद नामांकन निरस्त नहीं किया गया। हमने इसके संबंध में सभी प्रमाण प्रस्तुत किए हैं।








