रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बभनान स्टैंड पर आयोजित रक्षाबंधन समारोह में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की आत्मीयता और स्नेह की अनूठी तस्वीर देखने को मिली। पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता राज किशोर सिंह की ओर से आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र की बड़ी संख्या में बहनें और महिलाएं पहुंचीं। बहनों ने पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ राज किशोर सिंह की कलाई पर राखी बांधी, माथे पर तिलक लगाया और उनके स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। वहीं पूर्व मंत्री ने भी बहनों को उपहार भेंट कर उनके प्रति सम्मान, स्नेह और अपनत्व का भाव प्रकट किया।
रक्षाबंधन के अवसर पर बभनान स्टैंड पर सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। कार्यक्रम में पहुंचने वाली बहनों का पूर्व मंत्री ने आत्मीयता के साथ स्वागत किया। राखी बांधने के दौरान भाई-बहन के बीच स्नेह और भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला कि पूरा वातावरण पारिवारिक अपनत्व से भर गया। किसी बहन ने तिलक लगाकर राखी बांधी तो किसी ने मिठाई खिलाकर भाई के लिए मंगलकामना की। राज किशोर सिंह ने भी सभी बहनों का सम्मान करते हुए उन्हें उपहार प्रदान किए और रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।
24 वर्षों से निभा रहे हैं स्नेह की परंपरा
कार्यक्रम में राज किशोर सिंह ने कहा कि रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का अत्यंत पवित्र पर्व है। यह केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान, सुरक्षा और जिम्मेदारी के संकल्प का पर्व है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की बहनों और माताओं के साथ उनका रिश्ता वर्षों पुराना है।
उन्होंने कहा, “पिछले 24 वर्षों से क्षेत्र की बहनों और माताओं के हाथों राखी बंधवाता आ रहा हूं। यह मेरे लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अपने परिवार के बीच आने जैसा अवसर है। इतने वर्षों में बहनों का जो स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद मिला है, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।”
राज किशोर सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि क्षेत्र की बहनों से बना यह रिश्ता किसी राजनीतिक पद या परिस्थिति पर निर्भर नहीं है। यह दिल का रिश्ता है और वह इसे जीवन की अंतिम सांस तक निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बहनों का आशीर्वाद उन्हें हमेशा समाज और क्षेत्र के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।
“बहनों का आशीर्वाद किसी उपहार से कम नहीं”
पूर्व मंत्री ने कहा कि राखी का धागा देखने में भले ही साधारण हो, लेकिन इसमें बहन का प्रेम, विश्वास और भाई के प्रति मंगलकामना जुड़ी होती है। यही धागा भाई को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है।
उन्होंने कहा, “बहनों के हाथों बंधी राखी मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। उनके चेहरे की खुशी और उनका आशीर्वाद किसी भी उपहार से कहीं अधिक मूल्यवान है।”
उन्होंने क्षेत्र की सभी बहनों और माताओं को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखी और समृद्ध जीवन की कामना की।
बहनों ने बांधी राखी, मांगा भाई के लिए मंगल आशीर्वाद
समारोह में पहुंचीं बहनों ने भी राज किशोर सिंह के साथ अपने वर्षों पुराने आत्मीय संबंधों को याद किया। बहनों का कहना था कि रक्षाबंधन के अवसर पर भाई की कलाई पर राखी बांधना उनके लिए गौरव और खुशी का विषय है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब एक पारिवारिक परंपरा का रूप ले चुकी है।
राखी बांधने के बाद बहनों ने ईश्वर से राज किशोर सिंह के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की। पूर्व मंत्री ने भी बहनों के सिर पर स्नेह का हाथ रखते हुए उनके परिवारों की खुशहाली की कामना की।
रिश्तों की मजबूती का संदेश देता है रक्षाबंधन
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि आज के बदलते दौर में जब रिश्तों में औपचारिकता बढ़ती जा रही है, ऐसे आयोजन समाज को परिवार और आत्मीयता से जोड़ने का काम करते हैं। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत नहीं करता, बल्कि समाज में परस्पर सम्मान और विश्वास की भावना को भी बढ़ाता है।
कहा भी गया है—
“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाय॥”
प्रेम और विश्वास के रिश्तों की इसी डोर को समारोह में राज किशोर सिंह और क्षेत्र की बहनों ने और मजबूत किया।
रक्षा सूत्र बांधते समय वैदिक परंपरा का यह मंत्र भी रक्षाबंधन के भाव को अभिव्यक्त करता है—
“येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
अर्थात जिस रक्षा सूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से तुम्हें बांधती हूं—हे रक्षा सूत्र, तुम अडिग रहना।
उपहारों के साथ बहनों के चेहरों पर दिखी खुशी
राखी बांधने के बाद राज किशोर सिंह ने बहनों को उपहार भेंट किए। उपहार पाकर बहनों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। पूर्व मंत्री ने कहा कि उपहार तो केवल स्नेह व्यक्त करने का माध्यम है, वास्तविक खुशी उन्हें बहनों का आशीर्वाद और प्यार पाकर मिलती है।
उन्होंने कहा कि 24 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आगे भी इसी तरह जारी रहेगी। क्षेत्र की बहनों और माताओं के साथ उनका आत्मीय रिश्ता हमेशा बना रहेगा।
सैकड़ों राखियों ने बयां की 24 साल की आत्मीयता
बभनान स्टैंड पर आयोजित कार्यक्रम में राज किशोर सिंह की कलाई पर बंधी राखियां केवल रक्षाबंधन के धागे नहीं थीं, बल्कि वे वर्षों से कायम विश्वास, स्नेह और अपनत्व की कहानी बयां कर रही थीं। एक के बाद एक बहनों द्वारा राखी बांधे जाने का सिलसिला इस बात का प्रतीक बना कि रिश्ते जब दिल से निभाए जाते हैं तो समय के साथ उनकी जड़ें और गहरी होती जाती हैं।
“स्नेह की डोर कमजोर नहीं होती,
समय के साथ उसकी गांठ और मजबूत होती जाती है।”
इसी भाव के साथ रक्षाबंधन समारोह ने भाई-बहन के रिश्ते को नई ऊंचाई दी।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में वृज किशोर सिंह डिंपल, कृष्ण कुमार गुप्ता, करुणेश प्रताप सिंह टीटू, विनय सिंह, राजेश प्रकाश श्रीवास्तव, सत्य प्रकाश, रामजी सोनी, शैलेंद्र सिंह, आनंद गुप्ता, योगेंद्र सिंह, पवन सिंह, टिंकल सिंह, प्रिंस सिंह और राजन पांडेय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
समारोह का संदेश साफ था—रिश्ते पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व से मजबूत होते हैं। 24 वर्षों से बहनों के स्नेह से बंधे राज किशोर सिंह की कलाई पर सजी राखियों ने इसी अटूट रिश्ते की कहानी बयां की।







