लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले छात्रों के साथ मारपीट की गई, उन्हें धमकाया गया और उनके घरों तक लोगों को भेजा गया। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों ने कोई हिंसा नहीं की, बल्कि वे बेहतर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा पेपर लीक रोकने की मांग कर रहे थे।
क्या बोले आंदोलन में शामिल छात्र?
राहुल गांधी के साथ प्रेस वार्ता में छात्र आंदोलन से जुड़े कुछ युवा भी मौजूद थे। रिया अहीर ने कहा कि वह वही लड़की हैं, जो मुंबई पुलिस की गाड़ी के सामने खड़ी हुई थीं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 20 निर्दोष लड़कों को बचाने की कोशिश की थी। रिया ने आरोप लगाया कि अब उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। कार्यक्रम में वह युवती भी मौजूद थी, जिसे प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन लगी थी। इन छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए। शामिल छात्रों ने इस दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सावल उठाए
क्या सरकार पर राजनीतिक हमला भी बोला गया?
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- राहुल गांधी ने कहा कि हजारों युवाओं ने संविधान, भारत की अवधारणा और देश के भविष्य की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांग सुननी चाहिए, न कि उन्हें डराना चाहिए।
- राहुल गांधी ने यह भी कहा कि युवा मीडिया के सामने अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन गृह मंत्री और प्रधानमंत्री सामने आकर सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि छात्रों की मांग केवल बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक पर रोक और सुरक्षित भविष्य की है।
- राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष छात्रों की आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और सरकार को छात्रों की शिकायतों का समाधान करना चाहिए, न कि उन्हें दबाने की कोशिश करनी चाहिए।
क्या छात्रों के साथ जबरदस्ती और धमकी का आरोप लगाया गया?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के बाद छात्रों के घरों तक गुंडे भेजे गए और एक 15 साल की लड़की से जबरन माफी मंगवाई गई। उन्होंने कहा कि किसी छात्र को इस तरह डराकर माफी मंगवाना पूरी तरह गलत है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस इस तरह की कार्रवाई को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने दोहराया कि छात्रों ने न तो हिंसा की और न ही किसी तरह की आक्रामकता दिखाई, फिर भी उनके साथ सख्ती बरती गई।








