केदारनाथ धाम – धाम के रावल का उत्तराधिकारी घोषित करने पर उठे सवाल, BKTC को अभी तक नहीं मिला त्यागपत्र

केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग के महाराष्ट्र के नांदेड़ में अपने शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग को उत्तराधिकारी घोषित करने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। भीमाशंकर लिंग की ओर से बीकेटीसी को कोई त्यागपत्र नहीं मिला है। लिहाजा प्रक्रिया के पहले उत्तराधिकारी घोषित करना बीकेटीसी के नियमों के विपरीत है।

केदारनाथ धाम के रावल कर्नाटक के शैव लिंगायत समुदाय के होते हैं। वर्ष 2000 में भीमाशंकर लिंग की नियुक्ति हुई थी। इससे पहले सिद्धेश्वर लिंग केदारनाथ धाम के रावल रहे थे, उन्होंने भी स्वास्थ्य कारणों से रावल पद से त्यागपत्र देने के बाद इस पद पर भीमाशंकर लिंग की सिफारिश की थी। बीकेटीसी ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही भीमाशंकर लिंग को रावल पद पर नियुक्ति दी थी। करीब 25 साल से रावल पद की जिम्मेदारी संभाल रहे भीमाशंकर लिंग ने नांदेड़ में बीकेटीसी को सूचित किए बिना ही उत्तराधिकारी की घोषणा कर दी, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम 1939 के तहत केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में रावल व नायब रावल को नियुक्त करने का अधिकार बीकेटीसी को है। मंदिर समिति की ओर से रावल को वेतन दिया जाता है। रावल को पद पर रहते हुए बीकेटीसी के नियमों का पालन करना होता है। सवाल उठता है कि भीमाशंकर लिंग ने नांदेड़ में किसकी अनुमति से अगले रावल की घोषणा की। सवाल उठ रहे हैं कि किसकी अनुमति से रूप छड़ी को नांदेड़ भेजा गया। बीकेटीसी के नियमों के अनुसार रूप छड़ी को रावल केदारनाथ धाम व अधीनस्थ मंदिरों में प्रयुक्त कर सकते हैं। निजी आयोजन में रूप छड़ी को ले जाना धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध है।

बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि केदारनाथ धाम के रावल की ओर से उत्तराधिकारी घोषित करने के बारे में उन्हें अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। बीकेटीसी अधिनियम के तहत रावल की नियुक्ति का अधिकार मंदिर समिति को है। रावल अपना त्यागपत्र देते हैं तो नियमों के अनुसार ही नए रावल का चयन किया जाएगा।

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